वीजा मिलने में 2 साल की देर: विदेशी यूनिवर्सिटी में पढाई के सपने हो रहे हैं ढेर

नई दिल्ली: विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल करने की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए कोविड महामारी एक बड़ी रुकावट साबित हुई। अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में छात्रों को वीजा के लिए 1 से 2 वर्ष तक का वेटिंग पीरियड मिल रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्र को अगले 2 वर्ष बाद वीजा मिल सकेगा।

दरअसल कई देशों ने अब कोविड प्रतिबंध हटा लिए हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक अमरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यू.के., आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों में जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2022 के आरंभ में लगभग एक मिलियन थी, जो कि महामारी के पहले के स्तरों से लगभग दोगुनी है।

कोरोना के दौरान विदेशी यात्रा पर लंबे समय तक प्रतिबंध रहा और अब जब यह प्रतिबंध हटाए गए हैं तो बड़ी संख्या में छात्रों के वीजा एप्लीकेशन आ रहे हैं। यही कारण है कि उच्च शिक्षा से जुड़े लोकप्रिय विदेशी देशों विशेष तौर पर यू.के., अमरीका, कनाडा, आदि के वीजा में लंबी देरी की समस्या आ रही है।

अमरीका के लिए वीजा के लिए आवेदन करने के लिए मिलने के समय की प्रतीक्षा की अवधि दो वर्ष से अधिक हो गई है। दिल्ली के लिए प्रतीक्षा की अवधि 833 दिन है जबकि मुंबई के लिए प्रतीक्षा अवधि 848 दिन है।

इसी तरह इंग्लैंड में पढ़ाई के लिए वीजा का वेटिंग पीरियड 1 वर्ष है और कनाडा में 1 वर्ष से भी अधिक समय का वेटिंग पीरियड है। हालांकि इस बीच अचंभित करने वाली बात यह है कि चेन्नई में स्टूडेंट एक्सचेंज विजिटर वीजा के लिए प्रतीक्षा की अवधि केवल 29 दिनों की है जो कि पूरे देश में सबसे कम है।

कोलकाता के रहने वाले एक छात्र एस घोष ने कहा कि यहां वीजा के लिए आवेदन करने का समय मिलने में लगभग 440 दिन लग जाते हैं और अब वह चेन्नई से आवेदन करने की तैयारी कर रहा है क्योंकि वहां वीजा के आवेदन की मंजूरी के लिए सबसे कम यानि की 29 दिन लगते हैं।

घोष ने कहा मैं उम्मीद कर रहा हूं कि मेरा वीजा आवेदन शीघ्र स्वीकार कर लिया जाएगा। हमारी आर्थिक स्थिति के कारण हमने शिक्षा के लिए लोन लिया है और अब वीजा के आवेदन में देर होने के कारण हमारा परिवार उदास है। मैं अपने पिता के सपने को चकनाचूर होता हुआ नहीं देख सकता क्योंकि वे हमेशा से चाहते थे कि मुझे कनाडा के एक सबसे अच्छे विश्वविद्यालय में प्रवेश मिले।

कनाडा के विश्वविद्यालय स्वयं भी उन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं जिन्होंने किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया हुआ है और अपने वीजा के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वे उन्हें आवेदन की प्रक्रिया से संबंधित सभी समस्याओं के बारे में समय समय पर व्यावहारिक जानकारी प्रदान कर रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में भारत से अमरीका के वीजा के आवेदकों के बहुत अधिक संख्या में लंबित आवेदनों का मुद्दा अमेरिकी मंत्री एंटनी ब्लिंकन के सामने उठाया, जिस पर प्रमुख अमरीकी राजनयिक ने कहा वे इस मामले के प्रति संवेदनशील हैं और इसका समाधान करने की योजना बना रहे हैं।

ब्लिंकन ने वीजा का आवेदन करने वाले भारतीय नागरिकों के आवेदनों के लंबित रहने के लिए कोविड-19 महामारी को जि़म्मेदार ठहराया है। ब्लिंकन का कहना है कि थोड़ी प्रतीक्षा करें, अगले कुछ महीनों में इसका समाधान हो जायेगा, हम इस पर बहुत ध्यान दे रहे हैं।

वीजा में होनेवाली निरंतर देर ने पढाई के लोकप्रिय स्थानों की प्रतिस्पर्धात्मकता को खतरे में डाल दिया है। जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल और संयुक्त अरब अमीरात विदेशों में पढ़ाई करने के लिए अचानक उभरे स्थानों के तौर पर सामने आये हैं।

छत्तीसगढ़ के एक 23 वर्षीय छात्र संचित वडेरा ने कहा कि हजारों छात्र उत्सुकता से अपने आवेदन के स्वीकार करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, कई छात्रों ने पहले ही अपने पाठ्यक्रम ऑनलाइन प्रारंभ कर दिए हैं, परंतु इंटरनेट कनेक्टिविटी और समय क्षेत्र के अंतर के कारण उनकी परेशानी कम नहीं होती है।

वीजा मिलने में होने वाले लंबे विलंब के कारण, सितंबर के सत्र के लिए आवेदन करने वाले कई छात्रों को जनवरी के सत्र के लिए स्थगित कर दिया गया है और उनके लिए अभी भी यह सुनिश्चित नहीं है कि वे अगले स्थगित सत्र में अपने सपनों के विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने में सफल हो पायेंगे या नहीं।

विदेशों में पढ़ाई के लिए भारत के सबसे बड़े समुदाय आधारित प्लैटफॉर्म, यॉकेट के सह-संस्थापक सुमीत जैन ने बताया, विशेष रूप से कनाडा में, बीते दिनों की तुलना में स्थगन में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। हम यह नहीं कह सकते हैं कि जनवरी सत्र के लिए आवेदन करने वाले छात्रों के लिए स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी या नहीं क्योंकि यह दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों पर निर्भर करता है कि वे इतने सारे आवेदनों का प्रबंधन कैसे करते हैं। इस सत्र में लंबित आवेदनों की संख्या बढ़ी हुई थी, लेकिन हम जनवरी में इस स्थिति में सुधार होने की उम्मीद कर रहे हैं।

सुमीत जैन के मुताबिक छात्र बिना सोचे-समझे निर्णय नहीं लेते हैं। कभी-कभी जब छात्र ने केवल कनाडा के स्कूलों में आवेदन किया होता है तो वे देश नहीं बदलते हैं। उनमें से कुछ छात्र शिक्षा के बाद पी. आर. लेना चाह रहे होते हैं और दूसरे देशों की तरफ ध्यान देने का कोई मतलब नहीं होता है।

बहुत से छात्र विकल्प खुले रखते हैं और शिक्षा पर अधिक ध्यान देते हैं। वे दूसरे विकल्पों पर भी विचार करते हैं। अमरीका ने एस. टी. ई. एम. पाठ्यक्रमों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। गैर- एस. टी. ई. एम. के लिए हम कह सकते हैं कि यू.के. और ऑस्ट्रेलिया को कुछ छात्र मिलेंगे।

(इनपुट आईएएनएस)

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