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दशकों पुराने मामलों में कश्मीरियों की हो रही गिरफ्तारी पर मीरवाइज उमर फारूक ने जताई चिंता

मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी उमर फारूक ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि वो उन लोगों की लगातार हो रही गिरफ्तारी और हिरासत की प्रक्रिया को रोके, जो वर्षों से सामान्य जीवन जी रहे हैं और दशकों से किसी भी तरह की हिंसा से जुड़े नहीं हैं.

Jammu Kashmir News: मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी उमर फारूक (Mirwaiz Umar Farooq) ने दशकों पुराने मामलों में लोगों को गिरफ्तारी पर चिंता जताई है. साथ ही कश्मीर से बाहर की जेलों में बंद किए गए लोगों को वापस जम्मू और कश्मीर ट्रांसफर करने की अपील की है.

‘पुराने मामलों में लोगों की गिरफ्तारी चिंता की बात’

मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी उमर फारूक ने श्रीनगर की जामा मस्जिद में शुक्रवार, 12 दिसंबर की नमाज के दौरान कहा कि लोगों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि दशकों पुराने मामलों में लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ये उन लोगों और उन परिवारों के लिए काफी चिंता की बात है जो बहुत पहले ही अपने पुराने रास्तों से अलग हो चुके हैं.

कश्मीरियों के दर्द और परेशानियों को और बढ़ाता है’

मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि पहले ही हजारों कश्मीरी कैदी जम्मू-कश्मीर और बाहर की जेलों में बंद हैं, जिनमें से कुछ कई दशकों से कैद में हैं. इससे उनके परिवारों को बहुत दुख झेलना पड़ रहा है. ऐसे में और लोगों को गिरफ्तार करना कश्मीरियों के दर्द और परेशानियों को और बढ़ाता है.

कश्मीरियों को केंद्र शासित प्रदेश से बाहर की जेलों में लगातार बंद रखे जाने से पैदा हो रही गंभीर मानवीय और कानूनी चिंताओं की ओर ध्यान दिलाते हुए मीरवाइज ने कहा कि इस तरह की तरीकों से अक्सर मुकदमों में देरी होती है और परिवारों की उनसे मिलने की संभावना बहुत कम हो जाती है. जो इंसानियत और कुदरती इंसाफ के बुनियादी उसूलों के खिलाफ है.

राज्य सरकार से दखल देने की अपील

मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी उमर फारूक ने राज्य सरकार से दखल देने की अपील करते हुए ऐसे पुराने मामलों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की मांग की और बंदियों को वापस जम्मू-कश्मीर स्थानांतरित करने का आग्रह किया, ताकि न्याय की प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष, तेज और मानवीय हो सके.

उन्होंने यह भी अपील की कि सरकार हस्तक्षेप कर उन लोगों की लगातार हो रही गिरफ्तारी और हिरासत की प्रक्रिया को रोके, जो वर्षों से सामान्य जीवन जी रहे हैं और दशकों से किसी भी तरह की हिंसा से जुड़े नहीं हैं.

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