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बच्चों और बुजुर्गों को कैसे मिलेगा योजनाओं का लाभ? ललन सिंह के बयान पर अखिलेश ने उठाए सवाल

Uttar Pradesh News: आधार की जगह वोटर ID से सरकारी योजनाओं का पैसा देने के बयान पर सियासत तेज हो गई है. अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि अगर वोटर ID जरूरी हुई तो बच्चों और बुजुर्गों को योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा? उन्होंने SIR के जरिए करोड़ों लोगों के अधिकार छिनने की आशंका भी जताई. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

Uttar Pradesh News: केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने हाल ही में एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि अब आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी के एपीक नंबर से लाभार्थियों को भुगतान किया जाएगा. इस बयान को लेकर सियासी बवाल खड़ा हो गया है. विपक्षी दलों के नेता इस बयान को लेकर भाजपा की अगुवाई वाली NDA गठबंधन की सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. साथ ही सरकार से तीखे सवाल पूछ रहे हैं.

समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने बीते शुक्रवार (6 नवंबर) को एक सोशल मीडिया पोस्ट कर भाजपा सरकार से सवाल पूछा कि भाजपा सरकार के मंत्री जी यह भी साफ़ कर दें कि क्या अब बच्चों को ‘मिड-डे मील’ का खाना नहीं परोसा जाएगा क्योंकि वो तो वयस्क हुए नहीं हैं, तो फिर उनका वोटर आईडी या एपिक नंबर कहाँ से आएगा. ये तो लाभार्थी योजना ही है?” उन्होंने लिखा, “साथ ही जिन सीनियर सिटीज़न बुज़ुर्गों की बहुत ज़्यादा उम्र होने पर फ़िंगरप्रिंट या आँख की समस्या होने पर आइरिस से बायोमेट्रिक संभव नहीं होता, उनसे सरकारी योजनाओं का लाभ छीन लिया जाएगा.”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हाल ही में दावा किया था कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 1 करोड़ 27 लाख हिंदू लोगों के नाम काटे गए हैं. अखिलेश यादव ने ललन सिंह के बयान पर सवाल करते हुए मुख्यमंत्री योगी के आंकड़ों का जिक्र किया. उन्होंने कहा, “इसका मतलब तो ये भी हुआ कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के द्वारा दिए गए आँकड़े के अनुसार अब उत्तर प्रदेश के 1 करोड़ 27 लाख बहुसंख्यक वोटर लाभार्थी नहीं रहेंगे और इसमें अगर अन्य हटाए जा रहे नामों को भी जोड़ दिया जाए तो ये आँकड़ा लगभग 3 करोड़ जनता का हक़-अधिकार छीन लेगा क्योंकि SIR के बाद इतने नाम हटने का समाचार है.

अखिलेश ने अपने पोस्ट में लिखा, “दरअसल SIR नागरिकता छीनने का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है. ये षड्यंत्रकारी भाजपाई वोटर लिस्ट से नाम काटने के बाद आम जनता को नागरिक नहीं मानेंगे और जनता की ज़मीन, खेत, जायदाद, धन-संपत्ति, मिल्कियत, बैंक के पैसे, बैंक लॉकर में रखा बहुमूल्य सामान, गहना-ज़ेवर, आधार कार्ड, पैन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, डिग्री, पासपोर्ट, जाति प्रमाणपत्र, मैरिज सर्टिफ़िकेट, आरक्षण, कॉलोनी-आवास, शौचालय, गैस सब्सिडी व स्कूल में दाख़िले-दोपहर के भोजन व अस्पताल में भर्ती व राशन-पानी जैसे अन्य तरह के बाकी सारे अधिकार भी छीन लेंगे.”

विपक्षी पार्टियां लगातार लोगों को यही समझाने की कोशिश कर रही हैं कि वोटर लिस्ट से नाम कटने से सिर्फ आपका वोट का अधिकार नहीं जाएगा, बल्कि सरकारी योजना समेत अन्य अधिकार भी जाने का खतरा है. इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का आधार के बजाए वोटर आईडी कार्ड के एपीक नंबर से लाभार्थियों को भुगतान करने वाला बयान सामने आ गया. दरअसल, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए हैं. अब ललन सिंह के इस बयान से लोगों में यह डर बैठ गया है कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि ललन सिंह के मुताबिक अब आधार कार्ड के बजाय वोटर कार्ड के नंबर से भुगतान किया जाएगा.

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