Race Course Mosque Case: नई दिल्ली में प्रधानमंत्री के आधिकारिक घर के नजदीक स्थित ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन का खतरा मंडरा रहा है. रेस कोर्स मस्जिद के इमाम साहब ने एक वीडियो जारी करके मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन के खतरे के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बीते 7 अक्टूबर को मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई थी. वहीं, इस मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू से हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया और वक्फ बोर्ड पर निशाना साधते हुए सवाल खड़े किए.
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट कर लिखा, “रेस कोर्स मस्जिद मामले में किरेन रिजिजू के तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है. 1. 1977 से ही मस्जिद के एक ‘गजटेड वक्फ संपत्ति’ होने के बावजूद, वक्फ बोर्ड ने इसके गिराए जाने के आदेश को चुनौती नहीं दी. न ही उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने की कोई कोशिश की. 2. ‘वक्फ संशोधन अधिनियम’ (Waqf Amendment Act) भी इस मस्जिद को सुरक्षा देता है, क्योंकि यह ‘उपयोग के आधार पर वक्फ’ (waqf by user) है। अतीत में पंजीकृत ऐसी सभी संपत्तियां सुरक्षित मानी जाती हैं। फिर भी, कोई प्रयास नहीं किया गया. 3. चूंकि 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन नहीं हुआ है, इसलिए इस मामले को सुलझाना मंत्री की जिम्मेदारी है। हालांकि, बोर्ड के CEO भी इसमें हस्तक्षेप कर सकते थे, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ.”
दरअसल, रेस कोर्स मस्जिद के इमाम साहब का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वह मस्जिद को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं और न्याय चाहने वालों से मस्जिद को बचाने में मदद की अपील कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) के अधिकारियों की एक टीम (जिसमें कुणाल भास्कर भी शामिल थे) ने उनसे 6 दिनों भीतर जमीन खाली करने को कहा. साथ ही चेतावनी दी कि रेस कोर्स कार्यालय को बुलडोजर से गिराने के बाद मस्जिद को भी तोड़ दिया जाएगा.
उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड पर भी निराशा जताई और आरोप लगाया कि करीब छह महीने से स्थिति की जानकारी होने के बावजूद, बोर्ड ने कोई प्रभावी कानूनी कदम नहीं उठाया. साथ ही इमाम साहब ने वक्फ बोर्ड पर आरोप लगाया कि मस्जिद की बिजली, पानी की सप्लाई काटने की शिकायत के बाद बोर्ड ने केवल नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) को यूटिलिटी कनेक्शन (बिजली-पानी) के संबंध में एक पत्र लिखा और इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं की.
