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कदीमी मस्जिद हटाने के प्रस्ताव पर विवाद तेज, ओवैसी ने सरकार से पूछे सवाल

Qadeemi Mosque Controversy: केंद्र सरकार ने सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित ऐतिहासिक कदीमी मस्जिद को हटाने की बात दिल्ली हाई कोर्ट में रखी है. AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और जमात-ए-इस्लामी हिंद ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है. उन्होंने सरकार के धर्मनिरपेक्षता संबंधी तर्क पर सवाल उठाए हैं. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

Qadeemi Mosque Controversy: केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदीमी मस्जिद को हटाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में प्रस्ताव पेश किया है. इसके बाद केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर सियासी हमले तेज हो गए हैं. सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) की नई इमारत बननी है. इसीलिए नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित ऐतिहासिक कदीमी मस्जिद को हटाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रस्ताव रखा है. केंद्र सरकार का तर्क है कि यह मस्जिद “अनुचित है और सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं है.” ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार के धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़े किए हैं. साथ ही बताया कि ऐतिहासिक कदीमी मस्जिद संबंधित स्थान पर कृषी भवन के पहले से स्थित है.

‘सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास मास्टर प्लान’ के तहत प्लॉट नंबर 120 पर ‘कॉमन सेंट्रल सचिवालय’ (CCS) की बिल्डिंग 4 और 5 का पुनर्विकास और पुनर्निर्माण किया जाना है. इसमें मौजूदा शास्त्री भवन और कृषि भवन का हिस्सा भी शामिल है. असदुद्दीन ओवैसी ने कदीमी मस्जिद को हटाने के प्रस्ताव को लेकर सरकार पर सवाल उठाए है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक ट्वीट किया. उन्होंने अपने ट्वीट में लखा, “मोदी सरकार ने ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना की शुरुआत ‘भूमि पूजन’ के साथ की थी. जाहिर है, किसी सार्वजनिक परियोजना में एक धर्म विशेष के रीति-रिवाजों का इस्तेमाल करने से ‘धर्मनिरपेक्षता’ को कोई ठेस नहीं पहुँचती, लेकिन 1912 से भी पहले—यानी कृषि भवन के बनने से बहुत पहले—से वहाँ मौजूद एक मस्जिद से उन्हें दिक्कत है.

ओवैसी ने अपने ट्वीटर के शुरुआत में लिखा, “केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि नई दिल्ली में कृषि भवन परिसर के भीतर स्थित सदी पुरानी ‘कदीमी मस्जिद’ को हटाना होगा, ताकि ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना के तहत ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट’ (CCS) का पुनर्विकास किया जा सके. सरकार का तर्क है कि यह मस्जिद “अनुचित है और सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं है.”

गौरतलब है कि जमात-ए-इस्लामी हिंद ने भी सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया है. जमात-ए-इस्लामी के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा कि सरकार का यह दावा कि एक सदी पुरानी मस्जिद सार्वजनिक संपत्ति के धर्मनिरपेक्षता स्वरूप के अनुकूल नहीं है, पूरी तरह गलत है और इससे सरकार की पक्षपाती और सांप्रदायिक मानसिकता उजागर होती है. उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करना, न कि लंबे समय से स्थापित पूजा स्थल को हटाने के लिए इसका उपयोग करना.

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