JIH Madina Mosque Demolition: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने दिल्ली के शालीमार बाग में मदीना मस्जिद और उससे जुड़ी इमारतों को देर रात गिराए जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई ने दिल्ली नगर निगम (एम सी डी) का सांप्रदायिक चेहरा बेनकाब किया है. जमाअत के उपाध्यक्ष ने इस कार्रवाई की पारदर्शी जांच की मांग की क्योंकि मस्जिद को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी थी.
मीडिया को जारी एक बयान में उन्होंने कहा, “शालीमार बाग में मस्जिद के तोड़-फोड़ की घटना से स्पस्ट होता है कि नगर निगम ने अपने निष्पक्ष संवैधानिक ज़िम्मेदारी के रास्ते से हट कर सांप्रदायिक सोच को प्रदर्शित किया.15 सितंबर को ट्रिब्यूनल का निर्देश था कि सुनवाई की अगली तारीख तक मस्जिद के ग्राउंड फ्लोर के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए. 21 सितंबर को वकीलों के काम से दूरी के कारण मामले की सुनवाई नहीं हो सकी तो ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि अंतरिम आदेश तक यह 3 दिसंबर तक लागू रहेगा.जब नगर निगम को पता था कि मदीना मस्जिद का मामला अपीलेट ट्रिब्यूनल के समक्ष है तो उसने उसे क्यों गिराया? इसे गिराने का आदेश किसने दिया और इसे देर रात चुपके से क्यों अंजाम दिया गया?”
मलिक मोतसिम खान ने कहा, ” जबकि कानूनी कार्यवाही अभी चल ही रही थी, 22-23 सितंबर की रात मस्जिद के ऊपरी हिस्से के गिराए जाने, साथ ही इसके तरीके और समय पर वाजिब सवाल खड़े करते हैं. अधिकारियों को साफ़ तौर पर बताना चाहिए कि इसके तोड़-फोड़ के आदेश में क्या-क्या शामिल था, कौन-कौन से हिस्से गिराए गए, और ट्रिब्यूनल के लगातार जारी अंतरिम निर्देशों के बावजूद यह कार्रवाई कैसे की गई। मस्जिद के प्रतिनिधियों की ओर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि मस्जिद गिराए जाने से पहले क़ुरआन और अन्य धार्मिक सामग्री हटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। यह आरोप इतना गंभीर है कि संबंधित अधिकारियों पर भारतीय न्याय संहिता के लागू प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “हम फिर से दोहराना चाहते हैं कि एम सी डी की गैर-कानूनी कार्रवाइयों के बावजूद दिल्ली के मुसलमान अपने धर्म का पालन करने, अपनी धार्मिक पहचान, संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने के संवैधानिक अधिकारों से ज़रा भी समझौता नहीं करेंगे.किसी इबादतगाह को नष्ट किया जाना, कानूनी विवाद का समाधान और कानूनी प्रक्रिया का विकल्प कभी नहीं हो सकता.
