Chiraagh Festival 2026: 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को चिराग़ फ़ेस्टिवल में शामिल होने का मौक़ा मिला। इस फ़ेस्टिवल में बच्चों के लिए अलग-अलग तरह के गेम्स, क्विज़ और दूसरी गतिविधियों का इंतज़ाम किया गया था. पूरे कार्यक्रम में बच्चों की देखने को मिली. इसके साथ ही, मेहमानों, बच्चों के माता-पिता, वॉलंटियर्स और ऑर्गनाइज़र्स से बातचीत करके फ़ेस्टिवल के बारे में जानने का मौक़ा भी मिला.
फ़ेस्टिवल में बच्चों को उनकी कक्षाओं के अनुसार दो ग्रुप में बाँटा गया था। ग्रुप A में कक्षा पाँचवीं, छठी और सातवीं के बच्चे शामिल थे, जबकि ग्रुप B में कक्षा आठवीं, नौवीं और दसवीं के बच्चे थे। लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग सेशन आयोजित किए जा रहे थे. दोनों के सेशन अलग-अलग चल रहे थे और बच्चे अपने-अपने ग्रुप के अनुसार गतिविधियों में हिस्सा ले रहे थे.
फ़ेस्टिवल में बच्चों के लिए कई तरह के गेम्स रखे गए थे, जिनमें स्नेक गेम, ब्रेन टीज़र, क्विज़, लॉन्ग जंप रेस और स्नेक रेस जैसी गतिविधियाँ शामिल थीं. लॉन्ग जंप और दूसरी रेस की गतिविधियाँ ग्रुप B के बच्चों के लिए रखी गई थीं, जबकि स्नेक रेस जैसी गतिविधियाँ ग्रुप A के बच्चों के लिए आयोजित की जा रही थीं। इसके अलावा, क्विज़ और ब्रेन टीज़र में दोनों ग्रुप के बच्चे हिस्सा ले रहे थे। इन गतिविधियों के ज़रिए बच्चों को अपनी जानकारी, सोचने की क्षमता और शारीरिक कौशल दिखाने का मौक़ा मिल रहा था.
फ़ेस्टिवल की एक ख़ास बात वहाँ लगे इस्लाम से संबंधित पोस्टर्स भी थे. जगह-जगह अच्छे और जानकारी देने वाले पोस्टर्स लगाए गए थे, जिनमें अल्लाह के नाम उनके अर्थों के साथ लिखे हुए थे. इसके अलावा, अंबिया यानी अल्लाह के पैग़म्बरों के बारे में भी जानकारी दी गई थी. इन पोस्टर्स के ज़रिए बच्चों और वहाँ मौजूद लोगों को इस्लाम से जुड़ी कई बातें पढ़ने और जानने का अवसर मिल रहा था. इस तरह फ़ेस्टिवल में गेम्स और दूसरी गतिविधियों के साथ इस्लामी जानकारी को भी जगह दी गई थी.
कार्यक्रम में फ़ूड स्टॉल्स भी लगाए गए थे, जहाँ खाने-पीने की चीज़ों का इंतज़ाम था. इसके साथ ही एक बुक कॉर्नर स्टॉल भी मौजूद था, जहाँ किताबों के लिए अलग जगह बनाई गई थी. इन स्टॉल्स ने फ़ेस्टिवल में एक अलग आकर्षण जोड़ा और बच्चों तथा दूसरे लोगों को वहाँ मौजूद चीज़ों को देखने का मौक़ा मिला.
फ़ेस्टिवल के दौरान हमने अलग-अलग मेहमानों से भी बातचीत की और उनके विचार जानने की कोशिश की. इसके साथ ही, बच्चों के माता-पिता से भी बातचीत की गई. उनसे पूछा गया कि वे अपने बच्चों को चिराग़ फ़ेस्टिवल में किस उम्मीद से लेकर आए हैं और उन्हें अपने बच्चों के इस कार्यक्रम में शामिल होने पर कैसा लग रहा है। माता-पिता से बातचीत के ज़रिए यह समझने का मौक़ा मिला कि वे अपने बच्चों के लिए इस तरह के कार्यक्रमों से क्या उम्मीद रखते हैं और उनके लिए बच्चों की भागीदारी कितनी अहम है.
हमने फ़ेस्टिवल में काम कर रहे वॉलंटियर्स और ऑर्गनाइज़र्स से भी बातचीत की। उनसे जानने की कोशिश की कि इतने सारे बच्चों, अलग-अलग ग्रुप्स, गेम्स और गतिविधियों को संभालने के लिए किस तरह काम किया जा रहा है. कार्यक्रम की तैयारी से लेकर गतिविधियों को सही तरीके से चलाने तक, उनकी ज़िम्मेदारियों के बारे में भी जानकारी ली गई. इतने सारे इंतज़ामों को एक साथ संभालने में टीमवर्क और आपसी तालमेल की अहमियत को समझने का मौक़ा मिला.
इसके अलावा, हमने बच्चों के भी इंटरव्यू लिए और उनसे उनके अनुभवों के बारे में सवाल पूछे. बच्चों से यह जानने की कोशिश की कि उन्हें कौन-सी गतिविधि सबसे ज़्यादा पसंद आई, फ़ेस्टिवल में शामिल होकर उन्हें कैसा लग रहा है और उन्होंने यहाँ क्या नया सीखा. इन बातचीतों के ज़रिए बच्चों के नज़रिए से फ़ेस्टिवल को समझने का अवसर मिला.
कुल मिलाकर, चिराग़ फ़ेस्टिवल का अनुभव अच्छा और सीखने वाला रहा. अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए ग्रुप बनाना, लड़कियों और लड़कों के अलग सेशन आयोजित करना, तरह-तरह के गेम्स रखना, इस्लाम से संबंधित जानकारी वाले पोस्टर्स लगाना और बुक कॉर्नर तथा फ़ूड स्टॉल्स का इंतज़ाम करना इस कार्यक्रम की ख़ास बातें रहीं. मेहमानों, माता-पिता, बच्चों, वॉलंटियर्स और ऑर्गनाइज़र्स से बातचीत करने से फ़ेस्टिवल के अलग-अलग पहलुओं को जानने और समझने का मौक़ा मिला. इस तरह चिराग़ फ़ेस्टिवल का यह दिन बच्चों की भागीदारी, सीखने और अलग-अलग गतिविधियों के अनुभव से जुड़ा रहा.
Report: Nazia Ali
Cameraman- Abdul Rahman
