Pawan Khera Support Jamia Student Protest: जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों की भूख हड़ताल और धरना-प्रदर्शन जारी है. पिछले दिनों विपक्षी दलों के कई नेता कैंपस पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया और कई नेताओं को पुलिस ने कैंपस के गेट पर ही डिटेन कर लिया. वहीं, अब यह प्रदर्शन तेज होता जा रहा है. कैंपस के बार पिछले करीब दो हफ्तों से सैंकड़ों की तादाद में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती है. आज खबर आई कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जामिया आकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात करने वाले हैं. इस खबर के बाद जामिया के आसपास सुरक्षा बलों की तादाद बढ़ा दी गई और कैंपस के सामने बैरिकेडिंग कर दी गई.
जामिया के वर्तमान सुरेत-ए-हाल पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करके लिखा, 21वीं सदी के भारत में, दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों को एक चुनी हुई छात्र यूनियन बनाने की अपनी बुनियादी आज़ादी की मांग के लिए दो हफ़्ते से ज़्यादा समय तक विरोध-प्रदर्शन करना पड़ा. यह हमारे देश में लोकतंत्र की स्थिति पर एक गंभीर टिप्पणी है – खासकर युवाओं के नज़रिए से.”
उन्होंने आगे लिखा, “प्रशासन ने “इस्लामिस्ट” (इस्लामवादी) नारेबाज़ी का नैरेटिव गढ़कर इन विरोध-प्रदर्शनों को बदनाम करने और इनकी विश्वसनीयता घटाने की भी कोशिश की. लेकिन जब छात्रों ने दोषियों की पहचान करने के लिए CCTV फुटेज पुलिस को सौंपने की मांग की, तो प्रशासन पीछे हट गया. आख़िरकार, विश्वविद्यालय ने यह बहाना बनाया कि नारेबाज़ी वाली जगह के पास लगे तीनों कैमरे उस समय काम नहीं कर रहे थे – यह एक बेहद कमज़ोर बहाना है, जो उनकी मिलीभगत को उजागर करता है.”
उन्होंने लिखा, “छात्र यूनियन बनाने का अधिकार, बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा दिए गए नारे “शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित हो” को साकार करने के लिए बहुत ज़रूरी है. जामिया के छात्रों को भी, देश भर के अन्य छात्रों की तरह, यह अधिकार हासिल है, और हम उनके संघर्ष के साथ एकजुटता से खड़े हैं.”
गौरतलब है कि जामिया एडमिनिस्ट्रेशन ने एक आदेश जारी करके प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग मानते हुए छात्र संघ बहाल करने पर सहमति जताई थी. ऑर्डर के मुताबिक छात्र संघ की नई संविधान को स्वीकृति मिलने के 15 दिनों के भीतर छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे. वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों ने जामिया एडमिनिस्ट्रेशन पर छात्रों की सभी मांगों न मानने का आरोप लगाया और इस ऑर्डर को खारिज कर दिया. साथ ही छात्रों ने अपना प्रदर्शन को जारी रखने का ऐलान किया. छात्रों का कहना है कि ऑर्डर में एक तय सीमा नहीं बताई गई है कि कितने दिनों में छात्र संघ की नई संविधान को स्वीकृति मिल जाएगी.
