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खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी से गरमाई सियासत, बिलावल ने PTI पर उठाए सवाल

Emergency impose in Khyber Pakhtunkhwa: पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार ने 11 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू कर गवर्नर शासन लगाया. इस फैसले पर 14 अक्टूबर को नेशनल असेंबली में चर्चा हुई. बिलावल भुट्टो ने इमरान खान की पार्टी PTI को जिम्मेदार ठहराया, जबकि PTI के नेता और कार्यकर्ता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

Emergency imposed in Khyber Pakhtunkhwa: बीते 11 अक्टूबर को पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू कर दी. पाकिस्तान सरकार ने वहां की राज्य सरकार को बरखास्त कर दिया और गवर्नर रूल लागू कर दिया. खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी की सरकार थी. पाकिस्तान सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में लागू इस इमरजेंसी को पाकिस्तान के संविधान और कानून के मुताबिक और जरूरी माना है. वहीं, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कारकून और नेता इस इमरजेंसी का विरोध कर रहे हैं.

खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू करने का मुख्य वजह सूबे में बढ़ते आतंकवादी हमले को बताया गया है. इस इमरजेंसी पर बुधवार (14 अक्टूबर) को पाकिस्तान के नेशनल असेंबली में चर्चा हुई. खैबर पख्तूनख्वा में लागू इमरजेंसी पर चर्चा करने के लिए पार्लियामेंट्री अफेयर्स मंत्री तारिक फज़ल चौधरी ने नेशनल असेंबली में बिल पेश किया. वहीं, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (ppp) के चीफ बिलावल भुट्टो ने इस इमरजेंसी को सही बताया. उन्होंने इमरजेंसी लगाने के हालात के लिए PTI की खैबर पख्तूनख्वा सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया और इसे “राजनीतिक आत्मघाती हमला” करार दिया. उन्होंने PTI के कई नेताओं के नाम लेकर कहा, “मैं यह नहीं कहता कि ये लोग दहशतगर्दों के साथ मिले हुए हैं. मैं यह नहीं कहता. ये लोग भी दहशतगर्दी का मुकाबला करना चाहेंगे, क्योंकि नहीं चाहेंगे, यह हमारा मुल्क है. लेकिन ये लोग इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते कि इनका अपना वजीर-ए-आला (CM) इनकारी है.”

उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी (जिनकी भूमिका अब खत्म हो चुकी है) के उस कथित बयान का ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि वे आतंकवाद से उस तरह नहीं लड़ेंगे जैसा केंद्र चाहता था. “अगर यह राजनीतिक आत्महत्या नहीं थी, तो फिर और क्या थी?” भुट्टो परिवार के सदस्य ने सोचा कि क्या विपक्ष और KP के मुख्यमंत्री ने कोई ऐसी वजह छोड़ी है, जिसकी वजह से राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी – जिन्हें 18वें संशोधन को पास कराने पर गर्व है – आपातकाल की घोषणा पर “दस्तखत करने से इनकार” कर सकें।

उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत इस बात पर ज़ोर देते हुए की कि KP में इमरजेंसी और गवर्नर शासन संविधान के तहत उठाए गए कदम थे. संबंधित प्रावधानों को पढ़ते हुए, बिलावल ने कहा कि केंद्र ने “विपक्ष को साथ लाने की पूरी कोशिश की ताकि यह कदम न उठाना पड़े.

 

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