JIH On Kolkata Durga Pandal Stampede: जमात-ए-इस्लामी हिंद ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई दुखद भगदड़ पर गहरा दुख जताया है. इस घटना में कई लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए. संगठन ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की.
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा, “कोलकाता भगदड़ में लोगों की दुखद मौत से हमें गहरा दुख पहुंचा है. हमारी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं, और हम घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं. सार्वजनिक आयोजन में बेगुनाह लोगों की जान जाना बेहद चिंता का विषय है, और यह लोगों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों पर गंभीरता से विचार करने की मांग करते हैं.”
जवाबदेही और भीड़ के प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “अधिकारियों को इस त्रासदी के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च-स्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करानी चाहिए. उन्हें भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में हुई कमियों की पहचान करनी चाहिए और जहां भी लापरवाही पाई जाए वहां जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. जांच के नतीजे केवल सरकारी रिपोर्टों तक सीमित नहीं रहने चाहिए बल्कि इनसे ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। सरकार और संबंधित अधिकारियों को जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए.”
यह भगदड़ इस बात की सख्त जरूरत को उजागर करती है कि प्रशासन, पुलिस, आपातकालीन सेवाओं और कार्यक्रम आयोजकों के बीच बेहतर समन्वय, भीड़ को नियंत्रित करने के पुख्ता इंतजाम, संवाद और प्रभावी तालमेल होना चाहिए। अगर बचाव के इंतजाम नाकाफी हों तो अत्यधिक भीड़, खराब मौसम और भ्रम की स्थिति किसी भी सार्वजनिक आयोजन को एक बड़ी आपदा में बदल सकती है.
उन्होंने आगे कहा, “चाहे लोग धार्मिक त्योहारों, तीर्थयात्राओं या अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए इकट्ठा हों उनकी सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. आयोजकों और अधिकारियों को संभावित खतरों का पूर्वानुमान होना चाहिए, लोगों की आवाजाही को नियंत्रित और सुरक्षित प्रवेश और निकास मार्गों को सुनिश्चित करना चाहिए. पर्याप्त कर्मचारियों को तैनात करना चाहिए और चिकित्सा सहायता तथा आपातकालीन स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए समय रहते इंतजाम करने चाहिए. सार्वजनिक सुरक्षा के साथ कभी भी कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए.”
प्रो. सलीम इंजीनियर ने इस बात पर जोर दिया कि “घायलों को समय पर और उचित चिकित्सा उपचार मिलना चाहिए, जबकि मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जानी चाहिए. एक विश्वसनीय जांच से तथ्य स्थापित होने चाहिए और यह सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी भी सिद्ध लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए.”
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने पश्चिम बंगाल सरकार और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे एक निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करें, भीड़-भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करें, और मौजूदा त्योहारी सीजन के दौरान लोगों की जान बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं. इस तरह की त्रासदियों को रोकने के लिए पूर्व योजना बनाने, जिम्मेदार प्रशासन और इस पक्के संकल्प की जरूरत है कि मानवीय जीवन और जन सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए.
