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जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के सम्मेलन में 120 से अधिक विद्वान जुटे, पांच दिवसीय सम्मलेन में मुस्लिम समुदाय की चुनौतियों पर हुआ मंथन

JIH conference : जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में आयोजित पाँच दिवसीय सम्मेलन में देशभर के 120 से अधिक विद्वानों और मदरसा स्नातकों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन में मुस्लिम समुदाय की चुनौतियों, शिक्षा, सामाजिक सुधार और एकता पर चर्चा हुई. समापन पर प्रतिभागियों ने आपसी भाईचारे, सांप्रदायिक सद्भाव और समाज की तरक्की के लिए दस सूत्री घोषणा-पत्र स्वीकार किया. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

JIH conference: नई दिल्ली स्थित जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में ‘ओलमा और मस्जिद’ विभाग द्वारा आयोजित ‘मुस्लिम उम्मा (समुदाय) और ओलमा (इस्लामी विद्वानों) और मदरसा ग्रेजुएट के सामने आने वाली चुनौतियाँ’ शीर्षक से पांच दिवसीय सम्मलेन सफलतापूर्वक समाप्त हुआ. इस सम्मलेन में देश भर से अलग-अलग विचारधारा के 120 से अधिक स्कॉलर और मदरसों के ग्रेजुएट शामिल हुए. इस सम्मलेन के दौरान, मौजूदा हालात, देश और दुनिया के मुद्दों, मुस्लिम समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों और उन्हें हल करने में ओलमा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई. समापन सत्र में प्रतिभागियों ने दस सूत्रीय संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति व्यक्त की और इस पर प्रसन्नता व्यक्त की.

सम्मलेन के आखिरी सेशन में बोलते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने न्याय और बराबरी, एकता, वर्तमान पृष्ठभूमि में जागरूकता और संयम बनाए रखने के महत्त्व पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि इस सम्मलेन में अलग-अलग विचारधारा के जानकारों ने आंतरिक और बाहरी देशों के हालात की समीक्षा की, मुस्लिम समुदाय के सामने आने वाली जटिलताओं पर सोचा और उनके हल के लिए कई सुझाव दिए. ये सुझाव सोचने के लिए नए रास्ते खोलेंगे और हम इन्हें जितना हो सके लागू करने की कोशिश करेंगे.

इस सम्मलेन की अहमियत बताते हुए जमाअत के अध्यक्ष ने कहा कि इसकी एक बड़ी कामयाबी यह थी कि अलग-अलग विचारधारा के जानकारों ने थोड़े-बहुत मतभेदों के साथ आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता के साथ समय बिताया और मिलकर समुदाय के सामने आने वाली मुश्किलों पर मिलकर विचार किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि इसमें शामिल होने वाले लोग अपने-अपने इलाकों में भी इस सम्मलेन में बने प्रेम और एकता के माहौल को बढ़ावा देंगे ताकि समुदाय में आपसी भरोसा, सहनशीलता और सहयोग और मज़बूत हो सके.

समापन सत्र में ओलमा एवं मस्जिद विभाग के राष्ट्रीय सचिव डॉ. मुहम्मद रजी-उल-इस्लाम नदवी ने प्रतिभागियों की ओर से दस सूत्री संयुक्त घोषणा प्रस्तुत की, जिस पर सभी प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की और अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। संयुक्त घोषणा के बिंदु इस प्रकार हैं: (1) इस्लामी संदेश: हम अल्लाह का संदेश उसके सेवकों तक पहुँचाने का हर संभव प्रयास करेंगे, यह हमारा आधिकारिक कर्तव्य है.

(2) देशवासियों के साथ अच्छे रिश्ते: हम मुसलमानों से कहेंगे कि वे देशवासियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखें, इस्लाम और मुसलमानों के बारे में गलतफहमियां दूर करने की कोशिश करें, उनके दुख-दर्द बांटें और मानवीय मुश्किलों को सुलझाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करें। (3) शांति और व्यवस्था तथा सांप्रदायिक सद्भाव: हम देश में शांति और व्यवस्था का माहौल बनाए रखने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के प्रयासों को विफल करने के लिए अपनी पूरी क्षमता से प्रयास करेंगे.

(4) समाज सुधार: मुस्लिम समाज में फैली अलग-अलग सामाजिक बुराइयों को खत्म करने और इस्लाम की सच्ची शिक्षाओं से खुद को दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे। जुमा की नमाज़ के उपदेशों, शादी के उपदेशों और दूसरे मौकों पर अपने उपदेशों और बयानों के ज़रिए मुसलमानों को अल्लाह और उसके पैग़म्बर (स.अ.व.) के हुक्मों पर चलने के लिए प्रेरित. (5) नई पीढ़ी की धार्मिक और नैतिक प्रशिक्षण: हम नई पीढ़ी की धार्मिक शिक्षा और नैतिक प्रशिक्षण पर खास ध्यान देंगे और इस मकसद के लिए हम मस्जिदों और दूसरी जगहों पर वृहत स्तर पर स्कूल खोलने की कोशिश करेंगे.

(6) मुसलमानों में दृढ़ता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना: घोषणा में चिंता व्यक्त की गई कि मुसलमानों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और उनके धर्म, विश्वास, रीति-रिवाजों और पहचान को निशाना बनाया जा रहा है. ऐसे में हम मुसलमानों को और खासकर मुस्लिम युवाओं को निराशा और भावुक होने से बचाने की कोशिश करेंगे. वे देश और राष्ट्र के विकास और तरक्की के लिए सकारात्मक और रचनात्मक गतिविधियों की ओर सक्रिय होंगे. (7) समुदाय की एकता: हम समुदाय की एकता को बढ़ावा देने और समुदाय की आम समस्याओं को हल करने के लिए आपसी सहयोग और संयुक्त संघर्ष को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे.

(8) विचारधाराओं में असहमति पर शिष्टाचार का पालन: हम विचारधाराओं में असहमति को सिर्फ़ विद्वानों की चर्चा तक ही सीमित रखेंगे और यथासंभव विवादित मुद्दों को पब्लिक में चर्चा में लाने से बचेंगे. अगर किसी भी मौके पर इन मुद्दों को बताना ज़रूरी हो, तो हम असहमति के शिस्टाचार का पालन करेंगे. (9) मतभेदों और विवादों का समाधान: अगर अलग-अलग विचारधारा के लोगों के बीच मतभेद या विवाद होते हैं तो हम उन्हें सुलझाने की कोशिश करेंगे और आपसी समझ और एकता को बढ़ावा देंगे.

(10) कर्म और आचरण के माध्यम से इस्लाम की व्याख्या: हम अपने कर्म और आचरण के माध्यम से इस्लाम की सच्ची शिक्षाओं की व्याख्या करेंगे. हम वही करेंगे जो हम अवाम को करने की सलाह देते हैं और ऐसे शब्दों और कर्मों से बचेंगे जिनसे मतभेद बढ़ सकते हैं. सम्मलेन के अंत में प्रतिभागियों ने संयुक्त घोषणाओं को अपनी वास्तविक जीवन में लागू करने का संकल्प दोहराया.

 

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