शाहीन बाग में अतिक्रमण हटाने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली नगर निगम द्वारा की जा रही अतिक्रमण की कार्रवाई के खिलाफ CPIM की सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका खारिज कर दी गई है. आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि इस मामले में पीड़ितों के स्थान पर राजनीतिक दल क्यों याचिका लगा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान पूछा कि CPIM एक राजनीतिक दल है याचिका इनकी ओर से क्यों दायर की गई? इस मामले में कोई पीड़ित पक्ष आता तो बात समझ में आती. क्या कोई पीड़ित नहीं है?

इस पर सीनियर वकील पी सुरेंद्रनाथ ने कहा कि एक याचिका रेहड़ी वालों की भी है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले आपको हाईकोर्ट जाना चाहिए था. इसके साथ ये भी कहा कि अगर रेहड़ी वाले भी नियम तोड़ेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई कई जाएगी.

नवोदय टाइम्स के अनुसार, पिछले सप्ताह ही भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (CPIM) ने दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के इस अतिक्रमण विरोधी अभियान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में कहा गया था कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम झुग्गी बस्तियां ढहाने का प्लान बना चुके हैं. अगले सप्ताह इस पर अमल किया जाएगा.

याचिका में कहा गया कि चार मई को संगम विहार में गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया. अब सोमवार को शाहीन बाग में भी ऐसा करने का ऐलान किया जा चुका है. निगम की ओर से दिल्ली पुलिस को शाहीनबाग में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराने का नोटिस दिया जा चुका है.

बता दें कि आज शाहीन बाग में निगम का बुलडोजर नहीं चल सका. सुबह 11 बजे बुलडोजर वहां पहुंचा तो था लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका भारी विरोध किया. बुलडोजर एक घर के आगे खड़ी लोहे की रॉड्स हटा सका. इसके बाद बुलडोजर को वापस भेज दिया गया.

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