Waqf Amendment Act: वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज यानी कि सोमवार, 5 मई को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने वाली है. बता दें कि बीते महीने 16 और 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में लगातार दो दिन सुनवाई हुई थी. जहां कोर्ट ने इसके खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को सात दिन का समय दिया था.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया और वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था…
बता दें कि बीते महीने हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिलाया है कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक वक़्फ़ काउंसिल और बोर्ड में कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी.
‘वक़्फ़ एक्ट के खिलाफ हमारी कानूनी लड़ाई जारी’
वहीं AIMIM चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि हम इस एक्ट को असंवैधानिक मानते हैं. कोर्ट ने कहा है कि सेंट्रल वक़्फ़ काउंसिल और स्टेट वक़्फ़ काउंसिल का गठन नहीं किया जाएगा और ‘वक़्फ़ बाय यूजर’ को हटाया नहीं जा सकता. जेपीसी की चर्चा के दौरान मैंने सरकार द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों का विरोध करते हुए रिपोर्ट दी थी और बिल पर बहस के दौरान मैंने बिल को असंवैधानिक बताया था. इस एक्ट के खिलाफ हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी.
‘वक़्फ़ कानून को खत्म करने की मांग’
आपको बता दें कि वक़्फ़ (संशोधन) कानून की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और इसके लिए लगभग 73 याचिकाएं दायर की गई हैं. इन याचिकाओं में कहा गया है कि वक़्फ़ अधिनियम 2025 मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों का हनन करता है, इसलिए इस कानून को खत्म किया जाना चाहिए.

