Uttarakhand schools Bhagwat Geeta is compulsory: उत्तराखंड के विद्यालयों में अब श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक पढ़ाए जाएंगे. विद्यार्थियों को हर दिन प्रार्थना सभा के दौरान गीता श्लोकों का पाठ करना होगा. उत्तराखंड की धामी सरकार के इस आदेश के बाद 15 जुलाई से ही प्रदेश के तमाम शासकीय और अशासकीय स्कूलों में प्रार्थना के समय श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ शुरू हो गया है. उत्तराखंड की बीजेपी सरकार के इस फैसले के बाद विवाद शुरू हो गया है.
बीजेपी सरकार के आदेश का एससी-एसटी शिक्षक एसोसिएशन, मुस्लिम समुदाय और विपक्षी दल कांग्रेस विरोध कर रहा है. विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है.
‘यह आदेश सिर्फ विवाद के मकसद से जारी किया गया’
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के दो पहलू हैं. पहला राज्य सरकार की कोई ऐसी नीयत नहीं है कि गीता का ज्ञान बच्चों को सिखाया जाए और उनकी आचरण में उसकी झलक हो. सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य है कि किसी भी तरह से धार्मिक आधार पर कोई विवाद हो. ताकि, बीजेपी की ध्रुवीकरण की राजनीति प्रदेश में शुरू हो. उन्होंने कहा कि यह आदेश सिर्फ विवाद का विषय बनाने के मकसद से जारी किया गया.
‘कुरान और बाइबिल भी पढ़ाई जा सकती है’
वहीं स्थानीय मीडिया चैनलों से बात करते हुए राज्य सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अरशद ने कि यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है. अगर आप छात्रों को गीता पढ़ाने की योजना बना रहे हैं, तो कुरान और बाइबिल भी पढ़ाई जा सकती है. एक ही धर्म क्यों पढ़ाया जाए?
एससी-एसटी शिक्षक एसोसिएशन ने किया विरोध
उत्तराखंड के एससी-एसटी शिक्षक एसोसिएशन ने भी सरकार के इस आदेश कोसवापस लेने की मांग की है. एससी-एसटी शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय कुमार टम्टा ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता एक धार्मिक ग्रंथ है और संविधान में ये कहा गया है कि सरकारी निधि से चलने वाले स्कूलों में धार्मिक शिक्षा प्रदान नहीं की जा सकती. ऐसे में ये आदेश संविधान की अनुच्छेद 28 (1) का उल्लंघन कर रही है. इतना ही नहीं स्कूलों में तमाम धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं. ऐसे में ये निर्णय भेदभाव की भावना को जन्म दे सकता है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी जानकारी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आदेश की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश के विद्यालयों में विद्यार्थियों को श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक पढ़ाए जाएंगे. राज्य की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान गीता श्लोकों का पाठ अनिवार्य किया गया है. इससे छात्रों में अनुशासन, नैतिकता और जीवन मूल्यों की समझ मजबूत होगी. उन्होंने आगे कहा कि मुझे विश्वास है कि यह पहल उनके समग्र विकास में सहायक बनेगी.

