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‘BJP और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी मतदाताओं का नाम हटा रहे हैं…’ SIR पर तेजस्वी यादव का गंभीर आरोप

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि बिहार में 18 लाख मतदाता ऐसे हैं, जो मर चुके हैं, 26 लाख मतदाता अलग निर्वाचन क्षेत्रों में चले गए हैं और 7 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनका दो जगहों पर नाम है.

Tejashwi Yadav On SIR: बिहार में चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया पर सियासत बढ़ती ही जा रही है. चुनाव आयोग ने बीते दिनों रिपोर्ट जारी करते हुए कहा था कि 52 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे. इस पर बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं.

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि बिहार में 18 लाख मतदाता ऐसे हैं, जो मर चुके हैं, 26 लाख मतदाता अलग निर्वाचन क्षेत्रों में चले गए हैं और 7 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनका दो जगहों पर नाम है.

‘बीजेपी और चुनाव आयोग का साजिश’

चनाव आयोग के इन आंकड़ो पर तेजस्वी यादव ने सवाल खडे़ कर दिए हैं. तेजस्वी ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान की आड़ में बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर लोकतंत्र की सफाई नहीं, विपक्षी मतदाताओं की सफाई कर रहे हैं.

तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग द्वारा जारी 18,66,869 मृत मतदाताओं पर कहा कि 25 जनवरी 2025 को जब summery रिवीजन के बाद आपने पूरी वोटर लिस्ट अपडेट की थी तब ये 18 लाख मृत मतदाता आपको नहीं मिले थे? क्यों नहीं मिले थे? ये किसका दोष है?

सिर्फ छह महीने में 18 लाख मतदाता मर गए ?

तेजस्वी ने आगे कहा कि 18,66,869 लोग मर गए हैं. इसका मतलब 25 जनवरी से 24 जून तक 18,66,869 लोग मर गए? हम पूछना चाहते हैं कि इन मृतकों को पिछले वर्षों में मतदाता सूची में क्यों बनाए रखा गया था? क्या इससे पहले निर्वाचन आयोग सो रहा था?

26 लाख लोगों के दूसरे जगह शिफ्ट पर होने पर कहा…

चुनाव आयोग के मुताबिक, 26 लाख मतदाता दूसरे विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए. इस पर तेजस्वी यादव ने कहा कि चार महीने में इतने लोग शिफ्ट कर गए? बिना फिजिकली गए किए यह कैसे पता चला? क्या यह संभव है कि 26 लाख लोग एक ही वर्ष में अपने आवास बदल लें?

मतदाताओं के नाम दो जगह होने पर क्या कहा?

तेजस्वी यादव ने 7 लाख मतदाता के दो जगहों पर नाम होने पर कहा कि यह किस आधार पर तय किया गया? क्या हर मतदाता को व्यक्तिगत रूप से नोटिस भेजा गया? कितने लोगों ने जवाब दिया, कितने लोगों ने व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की? इस प्रक्रिया की पारदर्शिता में दोष है.

‘SIR एक सोची-समझी साजिश’

आरजेडी नेता तेजस्वी ने कहा कि चुनाव आयोग का यह पूरा पुनरीक्षण अभियान एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है. बिहार चुनाव में हार को देखते हुए बीजेपी के लोग कमजोर वर्ग, अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़े और विपक्षी दलों के समर्थकों के नाम सूची से हटा कर उन्हें लोकतंत्र और संविधान से बेदखल करना चाहते है. लेकिन इनकी मनमानी हम बिहार में चलने नहीं देंगे.

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