Arshad Madani: असम की बीजेपी सरकार पिछले कुछ समय से मुसलमनाों को निशाना बनाकर कार्रवाई कर रही है. हिमंता की सरकार अतिक्रमण हटाने के नाम पर मुसलमानों के घरों को तोड़ रही है. असम सरकार की इस एकतरफा कार्रवाई का भारी विरोध देखा जा रहा है. स्थानीय मुसलमान सहित देशभर की मुस्लिम तंजीमें असम की बीजेपी सरकार का विरोध कर रहे हैं. इसी बीच जमीयत उलमा–ए–हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने असम में मुसलमानों के खिलाफ हो रही कार्रवाई की कड़ी अलोचना की है. मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि असम में मुस्लिम बस्तियों को नहीं, बल्कि देश के संविधान और कानून को नष्ट किया गया है.
‘असम में मुस्लिम बस्तियां नहीं, संविधान तोड़ा गया’
जमीयत उलमा–ए–हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि असम में मुस्लिम बस्तियों को नहीं, बल्कि देश के संविधान और कानून को नष्ट किया गया है. मुसलमानों को जीने का अधिकार देना सरकार का फर्ज है.
मौलाना अरशद मदनी ने आगे कहा कि हिंदू मुस्लिम करके सत्ता तो हासिल की जा सकती है, लेकिन देश नहीं चलाया जा सकता है.
अरशद मदनी ने और क्या कहा?
मौलाना अरशद मदनी ने यह भी कहा कि आज देश उस मोड़ पर है जहां नफरत को देशभक्ति का जामा पहनाया जा रहा है और अत्याचारियों को कानून के शिकंजे से बचाया जा रहा है. देश में सांप्रदायिकता की आग में सिर्फ मुसलमान ही नहीं, बल्कि देश का अस्तित्व ही झुलस रहा है.
असम में मुस्लिम बस्तियों को नहीं, बल्कि देश के संविधान और क़ानून को नष्ट किया गया है। मुसलमानों को जीने का अधिकार देना सरकार का फ़र्ज़ है। हिंदू मुस्लिम करके सत्ता तो हासिल की जा सकती है, लेकिन देश नहीं चलाया जा सकता है।
“आज देश उस मोड़ पर है जहाँ नफ़रत को देशभक्ति का जामा पहनाया…— Arshad Madani (@ArshadMadani007) August 31, 2025
असम के मुख्यमंत्री को बर्खास्त करने की मांग
बता दें कि इससे पहले जमीयत उलमा–ए–हिंद की कार्यकारी समिति ने असम में जारी बेदखली और पचास हजार से अधिक परिवारों को बेघर करने जैसी कार्रवाइयों पर पर गहरी चिंता व्यक्त की थी. कार्यकारी समिति अपने प्रस्ताव में कड़ा रुख अपनाते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं विशेषकर भारत की राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश से मांग की है कि संविधान की रक्षा के लिए असम के मुख्यमंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके विरुद्ध हेट स्पीच (नफरती भाषण) के मामले दर्ज किए जाएं.

