Educate Girls gets Ramon Magsaysay Award: रेमन मैगसेसे पुरस्कार 2025 के विजेताओं की घोषणा रविवार को की गई. इन विजेताओं में एक भारतीय गैर-सरकारी संस्था भी शामिल है. यह संस्था दूरदराज गांवों में स्कूल से बाहर रह गई लड़कियों की शिक्षा के लिए काम कर रही है. इस संस्था का नाम फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली है जिसे आमतौर पर ‘एजुकेट गर्ल्स‘ (Educate Girls) के नाम से जाना जाता है.
रेमन मैगसेसे अवॉर्ड फाउंडेशन (RMAF) ने विजेताओं की घोषणा करते हुए कहा कि ‘एजुकेट गर्ल्स’ ने इतिहास रच दिया है. ‘एजुकेट गर्ल्स’ रेमन मैगसेसे अवॉर्ड पाने वाली भारत की पहली संस्था बन गई है.
‘एजुकेट गर्ल्स’ लड़कियों के लिए कर रही है काम
साल 2025 का रेमन मैगसेसे अवॉर्ड “फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली” को देने का फैसला करते हुए ट्रस्टी बोर्ड ने कहा कि यह संस्था लड़कियों और युवा महिलाओं को शिक्षा के जरिए सामाजिक और सांस्कृतिक भेदभाव से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है. यह संगठन उन्हें निरक्षरता की बेड़ियों से आजाद कर, उनके अंदर हिम्मत, हुनर और आत्मविश्वास भरता है ताकि वे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकें.
2025 Ramon Magsaysay Awardee EDUCATE GIRLS shows how education can dismantle barriers for girls and young women, replacing limitations with courage, skills, and the confidence to shape their own futures.
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— Ramon Magsaysay Award (@MagsaysayAward) September 2, 2025
बता दें कि रेमन मैगसेसे अवॉर्ड, जिसे एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है, एशियाई लोगों की निस्वार्थ सेवा में दिखाए गए महान जज्बे और समर्पण को सम्मानित करता है.
इनके अलावा अन्य दो विजेताओं में मालदीव की शाहिना अली को उनके पर्यावरण संबंधी कार्य के लिए और फिलीपींस के फ्लावियानो एंटोनियो एल विलानुएवा को उनके पर्यावरण संबंधी कार्य के लिए चुना गया है.
विजेताओं को क्या मिलेगा?
रेमन मैगसेसे पुरस्कार 2025 के विजेताओं को एक मैडल मिलेगा, जिस पर राष्ट्रपति रेमन मैगसेसे की फोटो होगी. इसके साथ उन्हें एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जिसमें उनके योगदान का उल्लेख होगा, और साथ ही नकद पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा. 67वें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन 7 नवंबर को मनीला के मेट्रोपॉलिटन थिएटर में किया जाएगा.
सफीना हुसैन ने की एजुकेट गर्ल्स की स्थापना
एजुकेट गर्ल्स की स्थापना 2007 में सफीना हुसैन ने की थी, जो लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ी हुई हैं. स्थापना के समय वो सैन फ्रांसिस्को में काम कर रही थीं. उन्होंने भारत लौटकर लड़कियों की अशिक्षा की समस्या से लड़ने का फैसला किया.
एजुकेट गर्ल्स की शुरूआत कैसे हुई?
राजस्थान से शुरुआत करते हुए, एजुकेट गर्ल्स ने उन समुदायों की पहचान की जहां लड़कियों की शिक्षा की स्थिति सबसे खराब थी. संस्था ने स्कूल से बाहर या कभी स्कूल न गई लड़कियों को कक्षा में लाने का काम किया, और यह सुनिश्चित किया कि वे पढ़ाई पूरी कर सकें ताकि आगे चलकर उन्हें उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल सकें.
24 लाख से ज्यादा बच्चों तक पहुंच
एजुकेट गर्ल्स ने अपनी स्थापना के बाद से अब तक 24 लाख से ज्यादा बच्चों को सुधारात्मक शिक्षा (Remedial Learning) में मदद की है. संस्था ने “प्रगति” नाम से एक खास कार्यक्रम शुरू किया, जिसकी मदद से 15 से 29 वर्ष की उम्र की 31,500 युवा महिलाओं ने ओपन स्कूलिंग के जरिए अपनी पढ़ाई पूरी की.
एजुकेट गर्ल्स का लक्ष्य है कि 2035 तक 1 करोड़ शिक्षार्थियों तक पहुंचा जाए. साथ ही, संस्था की योजना है कि वह अपनी पहुंच पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) तक बढ़ाए और अपने काम के मॉडल को दुनियाभर में दिखाए.
कौन है सफीना हुसैन?
54 वर्षीय सफीना हुसैन ने Educate Girls संस्था की स्थापना अपनी खुद की शिक्षा में आई रुकावटों से प्रेरित होकर की. दिल्ली में 1971 में जन्मी हुसैन को निजी परेशानियों के कारण तीन साल तक स्कूल छोड़ना पड़ा. बाद में एक पारिवारिक मित्र की मदद से वह फिर से पढ़ाई शुरू कर सकीं. इसके बाद वह अपने परिवार की पहली सदस्य बनीं जिन्होंने विदेश जाकर पढ़ाई की. उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डेवलपमेंट स्टडीज में डिग्री हासिल की.
सैन फ्रांसिस्को में Child Family Health International की प्रमुख के रूप में काम करने के बाद, हुसैन 2005 में भारत लौटीं. ग्रामीण भारत की एक यात्रा के दौरान, जब उन्होंने यह देखा कि सिर्फ बेटी होने पर लोगों को उनके माता-पिता के लिए दया आ रही थी, तो यह अनुभव उनके लिए एक टर्निंग पॉइंट बन गया. इसी के बाद उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करने का फैसला किया.

