Umar Khalid, Sharjeel Imam Bail Plea Rejected: दिल्ली हाई कोर्ट ने आज यानी कि मंगलवार, 2 सितंबर को 2020 दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और सात अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी. दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की बेंच ने ये फैसला सुनाया.
उमर खालिद, शरजील इमाम समेत 9 लोगों की याचिका खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ- साथ अथर खान, खालिद सैफी, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शादाब अहमद की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी. सभी आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत न देने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
उमर खालिद के वकील ने क्या कहा?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, उमर खालिद की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट त्रिदीप पैस ने दलील दी कि केवल किसी व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल होना, बिना कोई मैसेज भेजे, कोई अपराध नहीं है. त्रिदीप पैस ने कहा कि उमर खालिद के पास से न तो कोई सामान मिला है, न ही कोई पैसे की बरामदगी हुई है.
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 23-24 फरवरी 2020 की रात जो कथित “गुप्त बैठक” बताई जा रही है, वो वास्तव में गुप्त थी ही नहीं, जैसा कि अभियोजन पक्ष दावा कर रहा है.
खालिद सैफी ने क्या कहा ?
आरोपी खालिद सैफी की ओर से सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन ने अदालत में दलील दी कि क्या सिर्फ साधारण मैसेजों के आधार पर या अभियोजन पक्ष द्वारा ऐसे मैसेजों से कहानियां गढ़ने की कोशिश के आधार पर मुझ पर UAPA लगाया जा सकता है? क्या ये जमानत से इनकार करने या मुझे UAPA के तहत मुकदमा चलाने का आधार बन सकता है?
उन्होंने यह भी कहा कि सैफी को जमानत मिलनी चाहिए क्योंकि जून 2021 में तीन सह-आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है, और समानता के आधार पर उन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए.
शरजील इमाम ने क्या कहा ?
वहीं शरजील इमाम ने अदालत में कहा कि उनका बाकी सभी सह-आरोपियों से कोई संपर्क नहीं है और वे दिल्ली पुलिस द्वारा लगाए गए किसी भी तरह की साजिश या साजिश की बैठकों का हिस्सा नहीं हैं.
उनकी ओर से पेश हुए वकील तालीब मुस्तफा ने कहा कि अभियोजन पक्ष के मुताबिक दंगों में इमाम की कथित भूमिका 23 जनवरी 2020 तक की है. दिल्ली पुलिस ने जिस आखिरी कार्रवाई को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया है, वह बिहार में दिया गया एक भाषण है.
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि अगर आप देश के खिलाफ कुछ कर रहे हैं, तो फिर आपको जेल में रहना चाहिए. जब तक कि आप बरी न हो जाएं या दोषी साबित न हों.
मेहता ने कहा कि आरोपियों का इरादा देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करना था. इसके लिए उन्होंने एक खास दिन को चुनकर और ज्यादा दंगे व आगजनी की साजिश रची थी.

