Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार, 3 सितंबर को हिंदू दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े एक गैर-सरकारी संगठन, सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर एक याचिका खारिज कर दी. इस याचिका में यमुना के डूब क्षेत्र में कथित अवैध अतिक्रमणों को हटाने की मांग की गई थी, जिसमें एक मजार और तीन दरगाहें शामिल हैं.
‘सिर्फ दरगाहों को लेकर ही याचिका क्यों लाते हैं?’
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय ने इस याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप सिर्फ दरगाहों को लेकर ही याचिका क्यों लाते हैं? क्या आपको दूसरे अतिक्रमण दिखाई नहीं देते? आप सिर्फ मजारों को ही क्यों चिन्हित कर रहे हैं?
साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने एनजीओ की मंशा पर संदेह जताया और कहा कि यह चयनात्मक कार्रवाई दिखती है.
कोर्ट ने पूछा कड़ा सवाल
चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि हम आपकी मंशा पर बात कर रहे हैं. यह इस बेंच के सामने मजारों को हटाने की आपकी शायद पांचवीं या छठवीं याचिका है. कृपया इसे उस दिशा में न ले जाएं. हम ये नहीं कह रहे कि ये ढांचे वैध हैं… लेकिन सवाल है कि सिर्फ मजारें ही क्यों?
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि अगर आप वास्तव में जनसेवा करना चाहते हैं, तो और भी कई तरीके हैं. सिर्फ इस तरह की संरचनाओं को हटाने की याचिकाओं से नहीं. कृपया अपनी फाउंडेशन को समझाएं कि वे इससे बेहतर सार्वजनिक कार्य करें.
बता दें कि यह याचिका ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ की ओर से इसके संस्थापक प्रीत सिंह ने दायर की थी, जिनका कहना है कि यह संगठन नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाने का काम करता है.
संस्था के संस्थापक प्रीत सिंह हेट स्पीच के मामले में जमानत पर बाहर
हालांकि, प्रीत सिंह खुद मुस्लिम समुदाय के खिलाफ सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने से जुड़े कई मामलों में आरोपी रहे हैं. वर्तमान में वह एक हेट स्पीच के मामले में जमानत पर बाहर हैं.
कई बार दे चुके हैं नफरती भाषण
2022 में प्रीत सिंह और उनके संगठन पर बुराड़ी में आयोजित ‘हिंदू महापंचायत’ में दिए गए भड़काऊ भाषण के लिए दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था. वह 2021 में जंतर- मंतर पर हुए एक कार्यक्रम के आयोजक भी थे, जहां कथित तौर पर मुस्लिम विरोधी नारे लगाए गए थे.

