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जमाअत के अध्यक्ष ने नेपाल की स्थिति पर चिंता व्यक्त की… शांति, संवाद और तत्काल सुधारों का आह्वान किया

सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा, " वर्तमान में नेपाल में व्याप्त अशांति बेहद चिंताजनक है. किसी भी तरफ से हिंसा अस्वीकार्य है. हम कई युवा प्रदर्शनकारियों सहित बहुमूल्य जानों के नुकसान पर शोक व्यक्त करते हैं तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ-लाभ की प्रार्थना करते हैं.

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2025: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने नेपाल में बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करे हुए अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों दोनों से शांतिपूर्ण तरीकों और बातचीत के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने की अपील की है.

जमाअत के अध्यक्ष ने जताया दुख

मीडिया को जारी एक बयान में सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा, ” वर्तमान में नेपाल में व्याप्त अशांति बेहद चिंताजनक है. किसी भी तरफ से हिंसा अस्वीकार्य है. हम कई युवा प्रदर्शनकारियों सहित बहुमूल्य जानों के नुकसान पर शोक व्यक्त करते हैं तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ-लाभ की प्रार्थना करते हैं. हम उन राजनीतिक नेताओं और उनके परिवार के सदस्यों के परिवारों के साथ भी दुःख व्यक्त करते हैं जिन्होंने इस उथल-पुथल में अपनी जान गंवाई. राज्य का दमन और हिंसक विरोध प्रदर्शन, दोनों ही समाज को और अस्थिरता की ओर धकेलते हैं.”

हुसैनी ने जोर देकर कहा कि “यह संकट एक बहुत गहरी समस्याओं को रेखांकित करता है जैसे भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, मीडिया सेंसरशिप, आर्थिक संकट, जातिगत भेदभाव और विशेष रूप से युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और बेचैनी। समस्या तब और भी बदतर हो जाती है जब लोगों की आवाज को सहानुभूति के साथ नहीं सुना जाता तथा सत्तावादी तरीकों और मीडिया नियंत्रणों के माध्यम से दबा दिया जाता है. यह दुनिया भर की सभी सरकारों के लिए एक सबक है कि जब भ्रष्टाचार, अन्याय, मीडिया सेंसरशिप और लोगों की आवाज को दबाने की अनुमति दी जाती है, और जब युवाओं की आवाज अनसुनी कर दी जाती है तो निराशा अनिवार्य रूप से खतरनाक रूपों में फूट पड़ती है, जिससे हर जगह शांति और स्थिरता को खतरा पैदा होता है. ईश्वर और इतिहास के समक्ष जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए सच्चा नेतृत्व असहमति को दबाने में नहीं, बल्कि न्याय और विनम्रता के साथ सुनने में निहित है.”

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “नेपाल का बहुलवादी लोकतंत्र राजशाही के खिलाफ लंबे और कठिन संघर्ष का परिणाम है. यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत सावधानी बरतनी होगी कि वर्तमान विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक नवीनीकरण का अवसर बनें, न कि सामंती सत्तावादी शासन या बहुसंख्यकवाद के खतरों की ओर वापसी का. इन सबकों की अनदेखी करने से नेपाल का कठिन परिश्रम से अर्जित लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है.”

सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने की ये अपील

सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा: “सच्ची स्थिरता बल से नहीं, बल्कि न्याय, जवाबदेही और लोगों के अधिकारों के सम्मान से ही प्राप्त की जा सकती है। नेताओं और नागरिकों दोनों का मार्गदर्शन करने के लिए राजनीतिक सुधारों के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी और ईश्वर-चेतना के नवीकरण की भी आवश्यकता है. जमाअत-ए-इस्लामी हिंद नेपाल के लोगों के साथ एकजुट है, साथ ही जीवन की रक्षा, लोकतांत्रिक अधिकारों को बनाए रखने और शांति और समृद्धि एवं भविष्य के निर्माण के लिए तत्काल कदम उठाने का आह्वान करती है.

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