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AIMPLB ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा Waqf Act पर दिए गए अंतरिम फैसले को अधूरा बताते हुए नाराजगी जाहिर की

AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई है, लेकिन मुस्लिम समुदाय, बोर्ड, और न्याय की उम्मीद करने वाले नागरिकों को उम्मीद थी कि कोर्ट उन सभी धाराओं पर रोक लगाएगा जो संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन करती हैं.

AIMPLB On Waqf Amendment Act, 2025: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर दिए गए अंतरिम फैसले को अधूरा और असंतोषजनक बताते हुए नाराज़गी जताई है. AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास ने कहा कि हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई है, लेकिन मुस्लिम समुदाय, बोर्ड, और न्याय की उम्मीद करने वाले नागरिकों को उम्मीद थी कि कोर्ट उन सभी धाराओं पर रोक लगाएगा जो संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन करती हैं.

डॉ. इलियास ने कहा कि हालांकि कोर्ट ने आंशिक राहत दी है, लेकिन उसने बड़े संवैधानिक मुद्दों को नहीं छुआ, जिससे हमें निराशा हुई है.

उन्होंने आगे कहा कि कई प्रावधान जो आम लोगों को पूरी तरह मनमाने और असंवैधानिक लगते हैं, उन पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई गई है. डॉ. इलियास ने यह भी कहा कि अभी अंतिम फैसला आना बाकी है, लेकिन सरकार की कार्यशैली को देखते हुए लगता है कि जिन धाराओं पर रोक नहीं लगी है, उनका दुरुपयोग हो सकता है.

इन मामलों में मिली राहत

  • संपत्ति के अधिकारों की सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वक़्फ़ की संपत्तियों को तब तक न छीना जा सकता है और न ही उनके सरकारी रिकॉर्ड में कोई बदलाव किया जा सकता है, जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता. कोर्ट ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसमें वक़्फ़ की वैधता तय करने के लिए सरकारी अफसर की रिपोर्ट जरूरी मानी जाती थी. कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारी यह फैसला नहीं कर सकते कि कोई संपत्ति वक़्फ़ है या नहीं, यह काम न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है.

  • मनमाने अधिकारों पर रोक

कोर्ट ने धारा 3C को फिलहाल रोक दिया है, जिसमें यह कहा गया था कि सरकारी अधिकारी अकेले यह तय कर सकता है कि कौन वक़्फ़ बना सकता है या नहीं. कोर्ट ने उस नियम पर भी रोक लगा दी है, जिसके मुताबिक जांच के दौरान कोई संपत्ति वक़्फ़ माननी बंद की जा सकती थी. कोर्ट का साफ निर्देश है कि जब तक वक़्फ़ ट्रिब्यूनल इस मामले में पूरी तरह फैसला न कर ले, तब तक कोई भी वक़्फ़ संपत्ति छीनी नहीं जा सकती और न ही उसके रिकॉर्ड में कोई बदलाव किया जा सकता है.

  • गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या

धार्मिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर लोगों की चिंता को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि केंद्रीय वक़्फ़ परिषद में 22 में से 4 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकते. वहीं राज्य वक़्फ़ बोर्ड में 11 में से 3 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकते हैं.

  • 5 साल से मुस्लिम होने की शर्त

कोर्ट ने उस नियम पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि कोई व्यक्ति वक़्फ़ तभी बना सकता है, जब वह कम से कम 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा हो. यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार यह तय करने के लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं बना लेती.

AIMPLB ने ये मांग की

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि Waqf Amendment Act, 2025 जानबूझकर लाया गया है ताकि वक़्फ़ संपत्तियों को कमजोर किया जा सके और उन्हें जब्त किया जा सके. बोर्ड ने मांग है कि इस पूरे कानून को वापस लिया जाए और पुराना वक़्फ़ अधिनियम फिर से लागू किया जाए.

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