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‘उत्तर प्रदेश में गोहत्या के नाम पर बेबुनियाद FIR..’ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को लगाई कड़ी फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गोहत्या के नाम पर "बेमतलब की FIR" दर्ज करने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए योगी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.

Allahabad High Court On Frivolous FIRs on cow slaughter Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोहत्या अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत पुलिस द्वारा “बेमतलब की FIR” दर्ज करने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए योगी सरकार को फटकार लगाई है. हाईकोर्ट ने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में इन प्रावधानों का लोगों के खिलाफ लापरवाही से इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही कोर्ट ने गोरक्षा के नाम पर होने वाली गुंडागर्दी पर भी चिंता जताई है.

कोर्ट ने पूछा कड़ा सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी को निर्देश दिया है कि वे तीन हफ्तों के अंदर हलफनामा दाखिल करें. इस हलफनामे में उन्हें बताना होगा कि इस तरह से मनमानी FIR दर्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी.

जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी और जस्टिस अब्दुल मोइन की बेंच ने राहुल यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए. राहुल ने प्रतापगढ़ जिले में तीन जनवरी को अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी थी. उन पर नौ बछड़ों को ले जाने, उनका वध करने और गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर कहा कि वध का आरोप झूठा है क्योंकि नौ बछड़े जीवित पाए गए थे. अदालत ने अगले आदेश तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश देते हुए कहा कि इस मामले को इतना सरल नहीं माना जा सकता. क्योंकि अदालत इन अधिनियमों के प्रावधानों के तहत अधिकारियों और शिकायतकर्ताओं द्वारा दायर की जा रही रिपोर्टों से भरी हुई है.

हाईकोर्ट ने शीर्ष अधिकारियों को दिए ये निर्देश

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि हम प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी और डीजीपी से यह अपेक्षा करते हैं कि वे व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि आखिर क्यों इस तरह की बिना ठोस आधार वाली FIR धड़ल्ले से दर्ज की जा रही हैं.

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