Homeराजनीति'कानून से ऊपर न वर्दी, न ओहदा..' Sambhal हिंसा मामले में पुलिस...

‘कानून से ऊपर न वर्दी, न ओहदा..’ Sambhal हिंसा मामले में पुलिस अधिकारियों पर FIR के आदेश पर बोले सपा सांसद बर्क

सामाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्ररहमान बर्क ने कहा कि संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली मारने के मामले में तत्कालीन CO समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का CJM कोर्ट का आदेश एक ऐतिहासिक फैसला है.

Uttar Pradesh: संभल (Sambhal) जिले की एक अदालत ने नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के पास हुई हिंसा के दौरान गोलीबारी करने के आरोप में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी (Anuj Chaudhary) समेत दर्जनों पुलिस कर्मियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है. कोर्ट द्वारा पुलिस अधिकारियों पर FIR दर्ज करने के आदेश के बाद संभल के सामाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्ररहमान बर्क (Zia Ur Rehman Barq) ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का कोर्ट का आदेश एक ऐतिहासिक फैसला है.

सपा सांसद जियाउर्ररहमान बर्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं, न वर्दी, न ओहदा है.

जियाउर्ररहमान बर्क ने ऐतिहासिक फैसला बताया

जियाउर्ररहमान बर्क ने आगे कहा कि संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली मारने के मामले में तत्कालीन CO समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का CJM कोर्ट का आदेश एक ऐतिहासिक फैसला है. यह आदेश साफ संदेश देता है कि अफसर हो या आम नागरिक, कानून तोड़ने वाला बच नहीं सकता.

जिन अधिकारियों ने कानून की सीमा लांघी…

सपा सांसद बर्क ने कहा कि संभल हिंसा में जिन अधिकारियों ने कानून की सीमा लांघी है, अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है, न्यायपालिका के जरिये इंसाफ जरूर मिलेगा. उन्होंने आगे कहा कि जुल्म के खिलाफ और हक के लिए लड़ते रहेंगे. इंसाफ देर से सही, मगर जरूर मिलेगा.

यामीन की याचिका पर कोर्ट ने FIR का दिया आदेश

बता दें कि संभल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने संभल के तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, संभल कोतवाली चंदौसी के के तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर अनुज तोमर समेत कई अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है.

चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट विभान्शु सुधीर ने खग्गू सराय अंजुमन इलाके के रहने वाले यामीन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है.

पुलिस फायरिंग में गोली लगने का आरोप

यामीन ने आरोप लगाया कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद इलाके में हुई हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग में उनके बेटे आलम को गोली लगी थी. आलम रस्क और बिस्कुट बेचने के लिए बाहर निकला था, तभी वह हिंसा की चपेट में आ गया और उसे गोली लग गई.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि डर की वजह से उसके बेटे ने छिपकर ईलाज करवाया, और बाद में इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की. 9 जनवरी को सुनवाई के बाद, जिला कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी नामजद और अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए.

spot_img
1,716FansLike
6,134FollowersFollow
118FollowersFollow
20,300SubscribersSubscribe