Sonia Gandhi On Modi Government: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की हत्या पर मोदी सरकार के चुप्पी से लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी बीच कांग्रेस की सीनियर लीडर सोनिया गांधी ने भी भारत की मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले में चुप रहना “तटस्थ” नहीं बल्कि “जिम्मेदारी से पीछे हटना” है.
सोनिया गांधी ने और क्या- क्या कहा?
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने द इंडियन एक्सप्रेस के लिए एक कॉलम में लिखा कि तेहरान के साथ दिल्ली के रिश्ते “सिविलाइजेशनल होने के साथ- साथ स्ट्रेटेजिक” भी हैं. उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार को उन कई मौकों की याद दिलाई जब ईरान भारत की मदद के लिए आया था.
पीएम मोदी को लेकर क्या कहा?
सोनिया गांधी ने कहा कि शुरुआत में अमेरिका और इजराइल के बड़े हमलों को नजरअंदाज करते हुए प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ने सिर्फ ईरान के UAE पर किए गए जवाबी हमले की निंदा की, लेकिन उससे पहले क्या घटनाएं हुईं, इस पर कुछ नहीं कहा. बाद में उन्होंने अपनी ‘गहरी चिंता’ जताई और ‘संवाद और कूटनीति’ की बात की, जबकि यही प्रक्रिया तो इज़राइल और अमेरिका द्वारा किए गए बड़े और बिना उकसावे वाले हमलों से पहले चल रही थी.
‘ऐसे में हमारी विदेश नीति पर गंभीर सवाल’
उन्होंने आगे कहा, “जब किसी विदेशी नेता की निशाना बनाकर हत्या की जाती है और हमारा देश उसकी संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में साफ तौर पर कुछ नहीं कहता और निष्पक्षता छोड़ देता है, तो इससे हमारी विदेश नीति की दिशा और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं.”
कश्मीर के मुद्दे पर ईरान के समर्थन की याद दिलाई
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ने कश्मीर का मुद्दा भी याद दिलाया. उन्होंने कहा कि 1994 में जब ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के कुछ देशों ने कश्मीर के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी, तब तेहरान ने उसे रोकने में अहम भूमिका निभाई थी. उस समय ईरान के इस हस्तक्षेप ने कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठने से रोका, जो भारत की आर्थिक स्थिति के लिए एक संवेदनशील दौर था.

