नई दिल्ली, 07 मार्च 2026: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (Jamaat-e-Islami Hind) के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी (Syed Sadatullah Husaini) ने यहां अपने मुख्यालय में आयोजित मासिक प्रेस कांफ्रेंस में महिलाओं की गरिमा, बढ़ती आर्थिक संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष से जुड़ी चुनौतियों पर गहरी चिंता जताई.
आगामी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर बोलते हुए सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि हालांकि यह दिन महिलाओं की कामयाबियों और योगदान का जश्न मनाने के लिए है लेकिन महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध हमें याद दिलाते हैं कि सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर के लिए संघर्ष अभी पूरी नहीं हुई है.
उन्होंने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार केवल 2022 में भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4.45 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए. इनमें रेप, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, हैरेसमेंट, तस्करी और पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामले शामिल हैं. एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि उस वर्ष 31,000 से ज्यादा रेप केस रिकॉर्ड किए अर्थात प्रतिदिन लगभग 85 रेप केस रिपोर्ट हुए. महिलाओं के खिलाफ होने वाले सभी अपराधों में से एक-तिहाई से ज्यादा मामले सिर्फ घरेलू हिंसा के मामलों के थे जो दर्शाता है कि हिंसा अक्सर घरों और परिवारों में होती है. उन्होंने आगे कहा कि इस तस्वीर में महिलाओं के लापता होने की समस्या भी चिंताजनक है. एनसीआरबी के डेटा से पता चलता है कि हर साल पूरे भारत में कई लाख महिलाएं और लड़कियां लापता हो जाती हैं जिनमें से बड़ी संख्या का अभी भी पता नहीं चल पाया है. विशेष तौर पर इनकी तस्करी, जबरन मजदूरी, शोषण और यौन हिंसा का का जोखिम बना रहता है.
एपस्टीन नेटवर्क पर क्या कहा ?
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने यह भी बताया कि यौन शोषण की समस्या समाज में एक गहरे नैतिक संकट को दर्शाता है. एपस्टीन तस्करी नेटवर्क के बारे में जो खुलासे हुए हैं जिसमें ताकतवर लोग कमजोर नाबालिग लड़कियों का व्यवस्थित तरीके से शोषण करते थे. इस खुलासे ने दुनिया भर में लोगों की सोच को हिलाकर रख दिया है.
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का मानना है कि महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए न सिर्फ सख्त कानून और त्वरित न्याय की जरूरत है बल्कि सम्मान, विनम्रता और जवाबदेही पर आधारित एक मजबूत नैतिक और नैतिक ढांचे की भी जरूरत है.
यूनियन बजट 2026-27 पर जमाअत अध्यक्ष ने दी प्रतिक्रिया
आर्थिक मुद्दों पर बात करते हुए जमाअत के अध्यक्ष ने कहा कि यूनियन बजट 2026-27 पेश होने के बाद हलिया घटनाक्रम ने बढ़ते आर्थिक संकट की चिंताओं को और मजबूत कर दिया है. बजट में आपूर्ति- पक्ष प्रोत्साहन पर बहुत ज्यादा जोर दिया गया, जबकि आय वितरण, रोजगार सृजनऔर सामाजिक सुरक्षा पर कम ध्यान दिया गया. जैसे- जैसे दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ती है और घरेलू दबाव बढ़ता है वृद्धि के लाभ बराबर नहीं बंटते, जबकि आम घरों के बड़े हिस्से रुकी हुई आय, बढ़ती जीवन लागत और सीमित सामाजिक सुरक्षा से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध पहले से ही भारत की आर्थिक कमजोरी को उजागर कर रहा है. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने और रुपये के दबाव में आने से भारत का आयात बिल और महंगाई का खतरा बढ़ने की संभावना है. एक ऐसी अर्थव्यवस्था के लिए जो अपनी जरूरत का चार- पांचवां हिस्सा से ज्यादा कच्चा तेल आयात करती है, ऐसे भू-राजनैतिक झटके सीधे तौर पर ईंधन की ज्यादा कीमतों, परिवहन महंगाई और राजकोषीय दबाव में बदल जाते हैं. इन दबावों का असर ज़रूर घरेलू बजट और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा. सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि श्रम बाजार की स्थिति भी बहुत परेशान करने वाली बनी हुई है. भारत के कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा अभी भी अनौपचारिक और अनिश्चित रोजगार में फंसा हुआ है. गिग इकॉनमी के तेज़ी से बढ़ने से यह ट्रेंड और बढ़ गया है, जिसमें लाखों युवा वर्कर बिना किसी जॉब सिक्योरिटी, सही सैलरी या सोशल प्रोटेक्शन के प्लेटफॉर्म- आधारित कार्य में लगे हुए हैं. अध्ययन से पता चलता है कि गिग वर्कर्स का एक बड़ा हिस्सा हर महीने 15,000 से कम कमाता है और उनके पास हेल्थ इंश्योरेंस, पेंशन बेनिफिट्स या लीगल प्रोटेक्शन जैसे बुनियादी श्रम सुरक्षा के तरीकों तक पहुंच नहीं है.
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों पर चिंता जताई
पश्चिम एशिया में युद्ध पर बोलते हुए जमाअत के अध्यक्ष ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के चल रहे संयुक्त सैन्य हमलों पर ऑर्गनाइजेशन की गहरी चिंता दोहराई. ये हमले राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं. उन्होंने दक्षिणी ईरान के मिनाब में शाजारेह तैयबेह गर्ल्स स्कूल पर हुए हवाई हमले की निंदा की, जिसमें लगभग 160 से 170 स्कूली बच्चे मारे गए थे.
उन्होंने कहा कि इसने दुनिया की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और हथियारों से लैस लड़ाई के दौरान आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा टकराव को खाड़ी और पूरे मध्य पूर्व को शामिल करते हुए बड़े क्षेत्रीय झगड़े में बदलने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. ईरान को अपनी आजादी की रक्षा करने का अधिकार है, फिर भी स्थिति को एक बड़े संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए जो पड़ोसी देशों को सीधे टकराव में खींच ले और मुस्लिम दुनिया में मतभेदों को और गहरा कर दे. इस इलाके को लंबे और खतरनाक युद्ध में जाने से रोकने के लिए समझदारी और अच्छी कूटनीति की तुरंत जरूरत है. उन्होंने यह कहकर अपनी बात खत्म की कि स्थायीशांति और स्थिरता सिर्फ बातचीत, संप्रभुता का सम्मान और न्याय और अंतरराष्ट्रीयकानून के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता से ही मिल सकती है.

