Australian Cricket Captains Appeal For Imran Khan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगभग तीन सालों से पाकिस्तान के अदियाला जेल में कैद हैं. उनकी रिहाई के लिए पाकिस्तान में बार-बार देशव्यापी प्रदर्शन हुए, लेकिन उनकी जेल से रिहाई नहीं हुई. जेल में उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए हिंदुस्तान के क्रिकेटर्स कपिल देव और सुनील गवास्कर ने आवाज उठाई थी. वहीं, अब ऑस्ट्रेलिया के सात पूर्व कप्तानों ने अपनी सरकार से अपील की है कि वे जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत और उनके साथ हो रहे बर्ताव को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच कूटनीतिक स्तर पर दखल दें. सातों कप्तानों ने यह साफ किया कि उनकी यह अपील इमरान खान की राजनीति रुख का समर्थन या उनके मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं है.
उन्होंने कहा कि वे “मिस्टर खान के खिलाफ कानूनी या राजनीतिक मामले पर कोई पक्ष नहीं ले रहे हैं” और इन मामलों को पाकिस्तान की जिम्मेदारी मानते हैं. हालांकि, उन्होंने तर्क दिया कि हिरासत में किसी व्यक्ति के साथ कैसा बर्ताव किया जाता है, यह “बुनियादी इंसानियत का मामला है, चाहे उनकी राजनीति कुछ भी हो.” इमरान खान के लिए ऑस्ट्रेलिया के जिन सात कप्तानों ने अपनी सरकार को खुला पत्र लिखा है, उनके नाम एलन बॉर्डर, ग्रेग चैपल, इयान चैपल, बेलिंडा क्लार्क, किम ह्यूजेस, मार्क टेलर और स्टीव वॉ है.
इन सातों कप्तानों ने मंगलवार (15 सिंतबर) को यह खुला पत्र विदेश मंत्री पेनी वोंग को लिखा और उनसे आग्रह किया कि वह पाकिस्तान के अधिकारियों के सामने यह मामला उठाए. यह अपील 22 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों के उस पहले पत्र के बाद आई है जिसमें इमरान के साथ मानवीय व्यवहार की मांग की गई थी. उनके बेटों द्वारा हाल ही में एक इंटरव्यू में यह आरोप लगाए जाने के बाद कि उनकी जान को गंभीर खतरा है, उनकी सेहत को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.
एलन बॉर्डर, ग्रेग चैपल, इयान चैपल, बेलिंडा क्लार्क, किम ह्यूजेस, मार्क टेलर और स्टीव वॉ ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग को पत्र लिखकर कैनबरा से आग्रह किया कि वह पाकिस्तानी अधिकारियों के सामने यह मामला उठाए. यह अपील 22 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों के उस पहले पत्र के बाद आई है जिसमें इमरान के साथ मानवीय व्यवहार की मांग की गई थी. उनके बेटों द्वारा हाल ही में एक इंटरव्यू में यह आरोप लगाए जाने के बाद कि उनकी जान को गंभीर खतरा है, उनकी सेहत को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.
पत्र में कहा गया है, “विश्वसनीय रिपोर्टों के अलावा, उनके अपने बेटे और बहनें महीनों से उनकी सेहत और हिरासत में इलाज को लेकर सार्वजनिक रूप से गुहार लगा रहे हैं. उनकी चिंताओं में सीमित मेडिकल सुविधा, परिवार से बातचीत पर रोक और कानूनी सलाह तक बहुत कम पहुँच जैसी बातें शामिल हैं.”

