मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल ने दंगा प्रभावित शहर करौली का किया दौरा

राजस्थान के शहर करौली में हुए सांप्रदायिक हिंसा के बाद आज राष्ट्रीय मुस्लिम संगठनों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दंगा प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया.

इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में जमाअत इस्लामी हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष (अमीर)) सैयद सदातुल्लाह हुसैनी, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास, अध्यक्ष मजलिसे मुशावरत नावेद हामिद, नदीम खान फाउंडर, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट और जमात अहले हदीस के अमीर मौलाना असगर अली इमाम मेहदी सलफी भी शामिल थे.

राजस्थान के करौली में जहां सांप्रदायिक हिंसा हुई थी, वहां यह उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुंच कर हिंसा पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की और लोगों के हालात को जाना.

बता दें कि राजस्थान के करौली में डीजे बजाने और नारे लगाने की वजह से हिंसा हुई थी. जानकारी सामने आई थी कि 2 अप्रैल की शाम 4 बजे कलेक्ट्रेट सर्किल से रैली में शामिल करीब 200 बाइकों पर सवार 400 लोग रवाना हुए थे. रैली के आगे पिकअप में डीजे में गाने बज रहे थे, जबकि प्रशासन ने डीजे व लाउडस्पीकर का इस्तेमाल न करने की शर्त पर ही रैली की अनुमति दी थी.

रैली जब अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र से गुजर रही थी तब रैली में शामिल लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इसी के बाद आस-पास के मकानों व दुकानों से रैली में शामिल लोगों व पुलिस पर भारी पथराव शुरू हो गया. आगजनी व तोड़फोड़ से दोनों पक्षों के करीब 80 से अधिक व्यक्तिों की सम्पत्ति को नुकसान हुआ. इस वजह से राजस्थान के कई शहरों में धारा 144 लागू की गई थी.

मीडिया ख़बरों की मानें तो इस करौली हिंसा में 80 दुकानें जलीं, जिसमें से 73 दुकानें माइनरिटी समाज की थीं और 7 दुकानें बहुसंख्यक की हैं. नुकसान सभी का हुआ है. 100 से ऊपर गिरफ्तारियां हुईं हैं. 27 मामले दर्ज हैं.

इस हिंसा में मुसलमानों के घरों और दुकानों को जला दिया गया और ज़्यादातर मुस्लिमों की ही गिरफ़्तारी हुई है. इस हिंसा के लिए मुस्लिमों को ही ज़िम्मेदार माना जा रहा है जिसमें हिंसा भड़काने के आरोप में निर्दलीय पार्षद मतलूम अहदम के खिलाफ भी पुलिस ने मामला दर्ज किया है. पुलिस मतलूम अहमद की तलाश कर रही है.

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