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‘मुस्लिम होने की सज़ा?’ सुरेंद्रनाथ कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम का इस्तीफा, गंगाजल से ऑफिस का शुद्धिकरण, मचा बवाल

Surendranath College Controversy: कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम ने छात्रों के दबाव के बाद इस्तीफा दिया. आरोप है कि ABVP से जुड़े छात्रों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया और उनके चैंबर का गंगाजल से शुद्धिकरण किया. तरन्नुम ने धार्मिक टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना का भी आरोप लगाया. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

Surendranath College Controversy: क्या भारत में मुस्लिम समुदाय को भारत का नया दलित बनाया जा रहा है? भारत में मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव, हिंसा, आपत्तिजनक टिप्पणियां, मुस्लिम महिलाओं के साथ बदतमीजी ये आम होती जा रही हैं. मुस्लिम समुदाय के साथ ये सारी नाइंसाफियां भारत में हर कदम, हर फील्ड में देखने को मिल रही हैं. अगर किसी संस्थान में ऐसा नहीं है, तो बेहद ही खुशी की बात है. ऐसा ही एक मामला पश्चिम बंगाल से सामने आया है. यहां 2007 से कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज में वाइस प्रिंसिपल और शिक्षक-प्रभारी के पद सेवा दे रही मोहम्मदी तरन्नुम से भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विधार्थी परिषद (ABVP) ने वाइस प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम से जबरन इस्तीफा लिया. इस्तीफा के बाद प्रिंसिपल तरन्नुम को कॉलेज से पुलिस सुरक्षा में बाहर निकाला गया.

इस्तीफा के बाद ABVP के कार्यकर्ता प्रिंसिपल तरन्नुम के चैंबर में घुसकर अगरबत्तियां जलाई और गंगाजल से चैंबर का शुद्धिकरण किया. इस्तीफा से पहले ABVP से जुड़े छात्रों ने लगभग 23 घंटे तक प्रिंसिपल तरन्नुम के ऑफिस को घेरकर धरना दिया और इस्तीफा के लिए दबाव बनाया. तरन्नुम ने ‘द वायर’ से बातचीत में बताती हैं कि ‘छात्रों की ओर से जाति, धर्म और राजनीति को लेकर इतनी गालियां और इतनी अश्लील टिप्पणियां सुननी पड़ीं कि मैं दो दिन तक बीमार रही. उन्होंने मुझे गालियां दीं, मेरा मजाक उड़ाया और हर तरह की आपत्तिजनक बातें कहीं. इतनी ज़्यादा मानसिक प्रताड़ना झेलने के बाद भी मैंने फ़ैसला किया है कि जब तक वे मुझे मार नहीं देते, मैं इस्तीफ़ा नहीं दूंगी.’

गौरतलब है कि तरन्नुम पिछले 25 सालों से शिक्षक के तौर पर काम कर रही हैं और पिछले 2027 से कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज में वाइस प्रिंसिपल और शिक्षक-प्रभारी के पद सेवा दे रही थीं. लोग यह सवाल कर रहे हैं कि वाइस प्रिंसिपल तरन्नुम के ऑफिस का शुद्धिकरण करने की क्या जरूत थी? क्या उनके मुसलमान होने की वजह से वह ऑफिस अशुद्ध हो गया था, जो शुद्धीकरण की जरूरत पड़ी. क्योंकि आम तौर पर हम दलितों के खिलाफ ऐसी घटनाएं देखते हैं, जहां दलितों को अछूत मानते हुए, जातिवादी लोग दलितों द्वारा उपयोग किए गए स्थान, ऑफिस और दीगर चीजों का शुद्धीकरण करते हैं.

‘द वायर’ की रिपोर्ट के मुताबिक सुरेंद्रनाथ कॉलेज में एबीवीपी की कोई आधिकारिक रूप से घोषित इकाई नहीं है. फिर भी, कॉलेज परिसर के भीतर झंडा लगाने वाला यह एकमात्र संगठन है. इसके कॉलेज नेता संबित दास ने द वायर से कहा, ‘हम उनका चेहरा नहीं देखना चाहते. हम उनका इस्तीफा चाहते हैं. हम इस मांग पर अडिग हैं.’

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