AIMPLB On Himanta Sharma Anti Muslim Statements: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा द्वारा दिए गए हालिया मुस्लिम विरोधी और गहरी विभाजन पैदा करने वाले बयानों की कड़े शब्दों में निंदा की है. AIMPLB ने सुप्रीम कोर्ट से इस गंभीर मामले में तत्काल खुद संज्ञान लेने का आग्रह किया है.
AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास ने एक बयान में कहा कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरी बातें और खुली उकसावे वाली बातें सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक माहौल में तेजी से आम होती जा रही हैं.
AIMPLB ने और क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा कि जो बातें पहले कभी कुछ लोगों तक सीमित थीं, अब वही बातें सबसे ऊंचे संवैधानिक पदों पर बैठे लोग दोहरा रहे हैं. उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अब असम के मुख्यमंत्रियों ने बार- बार मुसलमानों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ और असंवैधानिक बयान दिए हैं.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि असम के मुख्यमंत्री ने तिनसुकिया में एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए “मियां” समुदाय को परेशान करने की बात कही, ताकि उन्हें असम छोड़ने पर मजबूर किया जा सके. साथ ही उन्होंने कहा कि इस समुदाय को मुश्किल में डालना उनकी जिम्मेदारी है.
AIMPLB ने आगे कहा कि इसके अलावा उन्होंने (हिमंता बिस्वा शर्मा) खुलेआम लोगों को वोटर लिस्ट से 4-5 लाख मुसलमानों के नाम हटाने के लिए फॉर्म नंबर 7 भरने के लिए प्रोत्साहित किया और उनके आर्थिक बहिष्कार की अपील की.
AIMPLB ने CM हिमंता पर उठाए गंभीर सवाल
डॉ. इलियास ने कहा कि यह चौंकाने वाला और नामंजूर करने लायक है कि एक मुख्यमंत्री, जिसने संविधान को बनाए रखने की कसम खाई है, वह खुलेआम एक खास समुदाय के साथ भेदभाव, उत्पीड़न और उनके वोट देने के अधिकार को छीनने की वकालत कर रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे बयान संवैधानिक शासन, कानून के राज और कानून के सामने समानता की मूल भावना पर सीधा हमला हैं.
डॉ. इलियास ने आगे कहा कि अगर चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान ऐसे गैरकानूनी दबावों का विरोध करने में विफल रहते हैं, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ जाएगी.
AIMPLB ने राष्ट्रपति से की ये अपील
AIMPLB ने भारत के राष्ट्रपति से भी अपील की है कि वे असम के मुख्यमंत्री के इन खतरनाक और असंवैधानिक बयानों के खिलाफ उचित संवैधानिक कार्रवाई करें. भारत के मुख्य न्यायाधीश से बिना किसी देरी के दखल देने का आग्रह किया. बोर्ड ने कहा कि अगर तुरंत और सख्ती से कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे नफरत फैलाने वाले भाषणों को और बढ़ावा मिल सकता है और सामाजिक अशांति और अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है.
बोर्ड ने सभी सेक्युलर राजनीतिक पार्टियों, सिविल सोसायटी ग्रुप्स और इंसाफ पसंद लोगों से अपील की कि वे भेदभाव की इस खुली अपील पर गंभीरता से ध्यान दें और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हों. साथ ही, AIMPLB ने असम के मुसलमानों से अपील की कि वे शांत रहें और इन उकसावों का जवाब सिर्फ संवैधानिक और कानूनी तरीकों से दें.

