ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर बोले असदुद्दीन ओवैसी- सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले को सुनने योग्य बताने का फैसला गलत

जयपुर: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने राजस्थान में चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी के तहत बुधवार को वो जयपुर पहुंचे हैं। जनसंपर्क अभियान के आगाज से पहले उन्होंने कहा- सुप्रीम कोर्ट की ओर से ज्ञानवापी मामले को सुनने योग्य बताने का फैसला गलत है। वो फैसला एक सेट बैक है। फैसला ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ के खिलाफ जाता है। भविष्य में वो फैसला ऐसे बहुत से मसलों को खोल देगा। वो फैसला भारत में अस्थिरता के हालात पैदा करेगा।

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, बाबरी मस्जिद के फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा था- 1991 के एक्ट के संविधान से ताल्लुक है। पहले की ऐतिहासिक गलतियों को हम सही नहीं करेंगे। अब उन मसलों को खोला जा रहा है। कोर्ट को कहना चाहिए 1991 का एक्ट है, फिर भी ऐसा हो रहा है। हम सब देख रहे हैं। ओवैसी जयपुर स्थित पार्टी कार्यालय में बुधवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे।

मदरसों का सर्वे हो रहा, आरएसएस के स्कूलों का नहीं
यूपी और उत्तराखंड में CM की ओर से मदरसों के सर्वे की बात कहे जाने पर ओवैसी ने कहा- सर्वे सिर्फ अन एडेड मदरसों का क्यों हो रहा है। सर्वे RSS के चलाए जाने वाले स्कूल्स में क्यों नहीं हो रहा है। मिशनरी के स्कूलों में सर्वे क्यों नहीं हो रहा है। प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में सर्वे क्यों नहीं हो रहा है। सरकारी स्कूलों में कितनी बिजली, पीने का पानी और टॉयलेट हैं। यह सर्वे नहीं हो रहा है। सिर्फ एक समुदाय के अन एडेड मदरसों का सर्वे करना मेरी नजर में टारगेटेड सर्वे है। इसके जरिए भविष्य में उन्हें तंग किया जाएगा। तकलीफ दी जाएगी। मुसलमानों के जकात और पैसों से चलने वाले मदरसों का सर्वे करना टारगेटेड है। सरकार को समझना चाहिए ‘आर्टिकल-30’ के तहत इन मदरसों को बनाया गया है।

बेरोजगारी-महंगाई के लिए गहलोत और मोदी सरकार जिम्मेदार
ओवैसी ने कहा- बेरोजगारी और महंगाई के लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार के साथ दिल्ली की मोदी सरकार भी जिम्मेदार है। माइनॉरिटी, दलित, आदिवासियों की पॉलिटिकल लीडरशिप बने यह हमारी कोशिश होगी। क्या राजस्थान में चुनावी गठबंधन उनकी पार्टी करेगी? इस पर कहा- गठबंधन का जब वक्त आएगा, तब तय करेंगे। अभी पार्टी और संगठन को मजबूत करने, अहम जिम्मेदार लोगों से मुलाकात करने की तैयारी चल रही है।

पूजा स्थल कानून-1991 क्या है?
1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार ने पूजा स्थल कानून बनाया। ये कानून कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है तो उसे एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। अयोध्या का मामला उस वक्त कोर्ट में था इसलिए उसे इस कानून से अलग रखा गया था।

क्यों बनाया गया था ये कानून?
दरअसल, ये वो दौर था जब राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से रथयात्रा निकाली। इसे 29 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचना था, लेकिन 23 अक्टूबर को उन्हें बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार करने का आदेश दिया था जनता दल के मुख्यमंत्री लालू यादव ने। इस गिरफ्तारी का असर ये हुआ कि केंद्र में जनता दल की वीपी सिंह सरकार गिर गई, जो भाजपा के समर्थन से चल रही थी।

इसके बाद वीपी सिंह से अलग होकर चंद्रशेखर ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई, लेकिन ये भी ज्यादा नहीं चल सकी। नए सिरे से चुनाव हुए और केंद्र में कांग्रेस की सरकार आई। पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। राम मंदिर आंदोलन के बढ़ते प्रभाव के चलते अयोध्या के साथ ही कई और मंदिर-मस्जिद विवाद उठने लगे थे। इन विवादों पर विराम लगाने के लिए ही नरसिम्हा राव सरकार ये कानून लेकर आई थी।

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