बीजेपी ने डेमोक्रेसी को हाईजैक कर लिया है: डॉ. तस्लीम अहमद रहमानी

उत्तर प्रदेश चुनाव जीतने के बाद जिस तरह से बीजेपी विधायक और हिन्दू युवा वाहिनी के ज़रिये मुस्लिम समुदाय के खिलाफ ज़हर उगला जा रहा है. ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म और मंगलवार को जो हिजाब पर कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा फैसला आया है उसको लेकर मुस्लिम पॉलिटिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ तस्लीम अहमद रहमानी ने सदा टाइम्स से ख़ास बातचीत की.

मायावती ने चुनाव हारने के बाद मुसलमानों को ज़िम्मेदार माना है इस सवाल पर उन्होंने इंटरव्यू के दौरान कहा कि मायावती, अखिलेश यादव, कांग्रेस, बीजेपी य कोई भी पार्टी हो, अगर कोई पार्टी किसी को अपना बंधुआ मजदूर समझती है तो लोकतंत्र में ये नहीं चल सकता.

उन्होंने कहा कि मायावती को मुस्लमान वोट क्यों दें, जो पार्टी शुरू से खामोश रही है. मायावती ने अगर मुसलमानों को समझा होता, उनके अच्छे की बात करतीं तो मुस्लमान मायावती को वोट देता. रही बात अखिलेश की तो मुसलमानों को एक उम्मीद दिखी तो वह उधर चले गए. एक समय था जब मुस्लमान कांग्रेस को वोट देता था लेकिन ये ज़रूरी तो नहीं था कि मुस्लमान मायावती को वोट देता. हम उनके बंधुआ मज़दूर तो नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि मायावती वोट और सीटों को बेचने का काम करतीं हैं, ऐसे में मुस्लमान उनको वोट क्यों दे?

उन्होंने कहा कि ये हाईजैक डेमोक्रेसी है. सत्तारूढ़ पार्टी ने डेमोक्रेसी को हाईजैक कर लिया है और उत्तर प्रदेश का नतीजा इसी हाईजैक डेमोक्रेसी का नतीजा है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बीजेपी जिस हिंदुत्व को रोड पर लाना चाहती थी वह अभी तक ला नहीं पाई है, इसलिए उनको अपनी नाकामी का एहसास है. उन्होंने कहा कि मुस्लमान पिछले 40 साल से खौफ में जी रहा है. पहले धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के ज़रिये यही डर दिखा कर वोट मांगे जाते थे लेकिन अब नफरती भाषण के ज़रिये डराने की कोशिश हो रही है और एक विचारधारा कायम करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि हिंदुत्व वाले ये समझते हैं कि मुसलमानों ने उन्हें 800 सालों तक गुलाम बना के रखा था और अब वह बदला लेना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि ये लोग अब सबको सजा देना चाहते हैं जो मुसलमानों का वोट लेते हैं और मुसलमानों को भी सजा देना चाहते हैं जो उनको वोट देते हैं.

‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर डॉ तस्लीम अहमद रहमानी ने कहा ‘फासीवादी सरकार सिर्फ झूठ फैला रही है.’ फिल्म के ज़रिये सिर्फ झूठ फैलाई जा रही है और नरसंहार की बात की जा रही है लेकिन नरसंहार के खिलाफ एक भी ऍफ़आईआर दर्ज नहीं है.

उन्होंने कहा कि सैकड़ों मुसलमानों के साथ ज़ुल्म हुआ लेकिन आप ने अभी तक उस पर कुछ नहीं किया. उस पर भी एक फिल्म बन जानी चाहिए ताकि वह सच भी देश के सामने आ सके. आप सिर्फ एक समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं और कामयाब नहीं हो पा रहे हैं. नफरत फैला कर ये लोग ध्रुवीकरण करना चाहते हैं लेकिन कामयाबी इनको मिल नहीं पा रही है.

उन्होंने हिजाब पर आये फैसले पर कहा कि किसी भी धर्म पर टिप्पणी करना कोर्ट का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि क़ुरान और हिजाब पर टिप्पणी करना कोर्ट का अधिकार नहीं है और ये सब कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है. अधिक जानकारी के लिए इंटरव्यू देखें…..

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