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चीन ने जम्मू- कश्मीर की शक्सगाम घाटी को अपना बताया, भारत के दावे को किया खारिज

भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के जरिए चीन द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढांचे के निर्माण को सख्ती से खारिज कर दिया था. भारत ने इसे “अवैध और अमान्य” बताया और कहा कि यह क्षेत्र भारत का “अभिन्न हिस्सा” है.

China claims Shaksgam Valley: चीन ने एक बार फिर से जम्मू और कश्मीर में शक्सगाम घाटी पर अपने दावे को दोहराते हुए कहा कि यह क्षेत्र चीन का हिस्सा है. साथ ही चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने जम्मू और कश्मीर में शक्सगाम घाटी पर भारत के दावे को भी खारिज कर दिया.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार, 12 दिसंबर को सीमा विवाद और चीन- पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के बारे में पूछे जाने पर कहा कि जिस इलाके का आपने जिक्र किया, वह चीन का है. चीन के लिए अपने इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना पूरी तरह से जायज है.

चीन ने और क्या कहा?

चीनी प्रवक्ता माओ निंग ने आगे कहा कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और दोनों देशों के बीच सीमा तय की थी. उन्होंने कहा कि यह समझौता दो संप्रभु देशों के अधिकारों के तहत किया गया था.

चीन ने CPEC को आर्थिक सहयोग परियोजना बताया

ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ ने कहा कि CPEC एक आर्थिक सहयोग परियोजना है, जिसका उद्देश्य स्थानीय आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना और लोगों की जीवन- स्तर में सुधार करना है.

माओ ने जोर देकर कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच हुआ सीमा समझौता और CPEC, कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख को प्रभावित नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले पर चीन की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है.

शक्सगाम घाटी के उत्तर में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) के शिनजियांग प्रांत, दक्षिण और पश्चिम में POJK के उत्तरी क्षेत्र और पूर्व में सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र की सीमा लगती है.

भारत ने चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर को अवैध बताया था

बता दें कि चीन ने ये दावा भारत द्वारा चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को अवैध निर्माण बताने के बाद किया है. 9 जनवरी को भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के जरिए चीन द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढांचे के निर्माण को सख्ती से खारिज कर दिया था. भारत ने इसे “अवैध और अमान्य” बताया और कहा कि यह क्षेत्र भारत का “अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा” है.

साथ ही भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते या तथाकथित CPEC को कभी मान्यता नहीं दी है.

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