Delhi: दिल्ली की एक अदालत ने तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पिछले महीने चलाए गए तोड़फोड़ अभियान के विरोध में हुई कथित हिंसा के मामले में गिरफ्तार 12 लोगों को जमानत दे दी. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान करने या उनकी अलग- अलग भूमिका साबित करने में नाकाम रहा.
तीस हजारी कोर्ट के एडिशनल सेशन जज भूपिंदर सिंह ने कई जमानत याचिकाओं पर एक साथ आदेश देते हुए अपने फैसले को कई आधारों पर रखा.
कोई आरोप साबित नहीं हुआ
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्पष्ट वीडियो फुटेज नहीं है, जिसमें आरोपियों की भीड़ में विशेष भूमिका दिखाई दे. साथ ही, किसी भी पुलिसकर्मी को गंभीर चोट लगने का प्रमाण नहीं मिला. अदालत ने यह भी नोट किया कि सोशल मीडिया के खुले तौर पर इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं है और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचने के ठोस प्रमाण भी मौजूद नहीं हैं.
अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों पर क्या कहा?
अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों ने अशांति फैलाने और भड़काऊ पोस्ट फॉरवर्ड करने के लिए व्हाट्सऐप का इस्तेमाल किया, ताकि गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जुटाकर पुलिसकर्मियों पर हमला किया जा सके. हालांकि, अदालत ने कहा कि आरोपी न तो उन पोस्ट के मूल लेखक थे और न ही उन्हें बनाने वाले. वे केवल उन्हें आगे भेज रहे थे, इसलिए इस आधार पर उन्हें आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त माना गया.
पिछले महीने हुई थी हिंसा
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने हिंसा में शामिल होने के आरोप में कुल 20 लोगों को गिरफ्तार किया है. यह हिंसा 6 और 7 जनवरी की रात को रामलीला मैदान इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई थी.
यह घटना कथित तौर पर उस समय हुई जब सरकारी अधिकारी हाई कोर्ट के आदेश के तहत फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बने अवैध निर्माण को हटाने पहुंचे थे. इस घटना के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 221, 132, 121, 190, 191(2), 191(3), 223(4), 109(1), 238, 49 और 3(5) के तहत, साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव अधिनियम, 1984 की धारा 3 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई.

