Gujarat High Court On Gujarat Riots 2002: गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को 2002 के गोधरा दंगों में शामिल तीन आरोपियों को बरी कर दिया. इन आरोपियों को 2002 के दंगे के लिए साल 2006 में आणंद सेशन कोर्ट ने दोषी ठहराया था.
गुजरात हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाह यह बताने में नाकाम रहे कि उन्होंने आरोपियों की पहचान कैसे की और उन्होंने यह भी नहीं बताया कि 100 से ज्यादा लोगों की भीड़ में उनकी क्या भूमिकाएं थी. गवाह ने इन अभियुक्तों की सही भूमिका के बारे में भी नहीं बताया कि उसने किस तरह 100- 200 लोगों की भीड़ में इन्हें देखा था.
किसने की थी अपील?
हाईकोर्ट के जस्टिस गीता गोपी ने यह आदेश दो अपीलों को स्वीकार करते हुए किया. एक अपील सचिनभाई हसमुखभाई पटेल और अशोकभाई जशभाई पटेल द्वारा दायर की गई थी, जबकि दूसरी अशोक बनारसी भरतभाई गुप्ता द्वारा दायर की गई थी.
अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि अभियुक्त उस भीड़ में शामिल थे जिसने कई दुकानों में आग लगा दी थी. वहीं अदालत ने अपने 98 पृष्ठ के फैसले में कहा कि 2006 में दोषसिद्धि एक गवाह की गवाही पर आधारित थी जिसने अभियुक्त की स्पष्ट पहचान नहीं की थी.
अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?
अभियोजन पक्ष ने आगे कहा कि आरोपियों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 143, 147, 148 और 149 के तहत अपराध किए, जिसमें घातक हथियारों के साथ दंगा करना, आगजनी करना, शिकायतकर्ता और गवाहों की दुकानों को निशाना बनाना शामिल है.
हिंसा में लगभग 3,000 मुसलमान मारे गए थे
बता दें कि रिपोर्टों के मुताबिक, इस हिंसा में लगभग 3,000 मुसलमान मारे गए थे. 20,000 घर और 360 धार्मिक स्थल नष्ट हो गए और लगभग 150 हजार लोग विस्थापित हुए. गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर पुलिस को कार्रवाई का निर्देश देकर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था.

