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US-Pak रिश्तों पर क्या बोल गए मार्को रुबियो? पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने उठाए सवाल

Marco Rubio India Visit: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-ईरान और अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्तों की तुलना की, जिस पर पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि दोनों संबंधों की तुलना उचित नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान का भारत के खिलाफ आतंकवाद से जुड़ा इतिहास रहा है, जबकि भारत के ईरान से रिश्ते अलग हैं. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

Marco Rubio India Visit: डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच खटास देखने को मिल रही है. वहीं, अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में नजदीकियां बढ़ी हैं. इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के चार दवसीय दौरे पर हैं. वह 19 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक महाराष्ट्र के जामनगर में रहेंगे. उन्होंने बीते मंगलवार (20 अक्टूबर) अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने कुछ मीडिया चैनल्स को इंटरव्यू भी दिए. इंटरव्यू के दौरान किए गए एक सवाल के जवाब में रुबियो ने अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्तों की भारत-ईरान के रिश्तों से तुलना कर दिया. इस तुलना को लेकर भारत में रुबियो को तनकीद का सामना करना पड़ रहा है.

अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्तों को भारत-ईरान के रिश्तों से तुलना करने पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट किया. उन्होंने इस तुलना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, यह एक अनुचित तुलना है. पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों की तुलना ईरान के साथ भारत के संबंधों से करना, किसी भी कसौटी पर खरा नहीं उतरता. ईरान हमारा “प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी” (Major non-NATO Ally) नहीं है.
हमने क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए ईरान को हथियार नहीं दिए हैं. अमेरिका ने पाकिस्तान को F-16 लड़ाकू विमान और AMRAAM मिसाइलें दी हैं. ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने में हमारी कोई भूमिका नहीं रही है, जबकि पाकिस्तान की रही है. अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु संपन्न होने को एक तरह से स्वीकार कर लिया है.”

उन्होंने आगे लिखा, “अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि पाकिस्तान का एक लंबे समय से भारत के खिलाफ आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल करने का इतिहास रहा है। उसने सालों तक ओसामा बिन लादेन को पनाह दी. वह तालिबान आदि का संरक्षक (गॉडफादर) रहा है। अमेरिका ने ईरान को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश घोषित किया है और उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. अमेरिका ने अब चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी को तो मंजूरी दे दी है, लेकिन वह CPEC और ग्वादर का विरोध नहीं करता है.”

दरअसल, सीएनएन न्यूज़ 18 के राहुल जोशी ने मार्को रुबियो से पूछा, ”एक और सवाल पाकिस्तान को लेकर अमेरिका के रुख़ पर है. आपने 2025 में सीनेटर रहते हुए कहा था कि अगर पाकिस्तान भारत के ख़िलाफ़ आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो आप पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी सुरक्षा सहायता में कटौती के लिए एक बिल पेश करेंगे. क्या आपका रुख़ बदला है? क्या इस नीति में कोई बदलाव हुआ है?”

इस सवाल के जवाब में रुबियो ने कहा कि हम दुनिया में कहीं भी होने वाले आतंकवाद के खिलाफ हैं और हम उन सभी देशों के खिलाफ हैं, जो आतंकवाद को पनाह देते हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैं अब सीनेटर नहीं हूँ, मैं अब अमेरिका का विदेश मंत्री हूँ. उन्होंने कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री होने के नाते मुझे विदेश नीति का संचालन करना होता है. हमें अलग-अलग देशों से रिश्ते बना रखने होते हैं और उन देशों से भी रिश्तें बनाए रखने होते हैं, जिनसे हमारी कुछ मुद्दों पर असहमति होती है.

उन्होंने पाकिस्तान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जिससे संबंध बनाए रखने होंगे. उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार है और भगौलिक स्थिति के लिहाज से भी हमे पाकिस्तान से रिश्ते बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने पाकिस्तान-अमेरिका के रिश्ते को भारत-ईरान के रिश्ते से कंपेयर किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ रिश्ते रखना जरूरी है, ठीक उसी तरह जैसे भारत को ईरान के साथ रिश्ते रखने पड़े हैं.

 

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