Homeविदेशइस्तांबुल में E3-R4 देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक, मिडिल ईस्ट...

इस्तांबुल में E3-R4 देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक, मिडिल ईस्ट के संघर्षों से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कनरे पर होगी चर्चा

E3 R4 Foreign Ministers meeting in doha: तुर्की के इस्तांबुल में E3 और R4 समूहों के विदेश मंत्रियों की बैठक हो रही है. इसमें मध्य पूर्व के हालात, फिलिस्तीन, होर्मुज जलडमरूमध्य, रूस-यूक्रेन युद्ध और सऊदी-हूती संघर्ष पर चर्चा होगी. बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री रास्तों की स्वतंत्रता और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम करने पर भी बातचीत होगी. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

E3 R4 Foreign Ministers meeting in doha: तुर्की के शहर इस्तांबुल में शुक्रवार (23 अक्टूबर) को ‘E3’ समूह वाले यूरोपीय देशों और ‘R4’ समूह वाले क्षेत्रीय देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक हो रही है. दोनों समूहों के सदस्य देशों के विदेश मंत्री इस बैठक में मिडिल ईस्ट के हालात, फिलिस्तीन के मुद्दे, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, रूस-यूक्रेन युद्ध और सऊदी-हूती के संघर्ष के मामले पर बातचीत करेंगे. इन दोनों समूहों के बीच हो रही इस बैठक की मेजबानी तुर्की कर रहा है.इस बात की जानकारी तुर्की के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (22 अक्टूबर) को दी थी.

‘E3’ समूह में यूरोप के देश ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी हैं. इसे 20 साल से भी पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर राजनयिक समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया था. वहीं, ‘R4’ समूह में तुर्की, सऊदी अरब, पाकिस्तान और मिस्र हैं. यह समूह मार्च में बना था और इसका मुख्य ध्यान क्षेत्रीय सुरक्षा तथा अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के प्रयासों पर है.

इन दोनों समूहों के बीच हो रही इस बैठक की मेजबानी तुर्की कर रहा है. ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड के कार्यालय ने बताया कि यह बातचीत मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सऊदी अरब के हालात पर केंद्रित रहेगी. मिलिबैंड के कार्यालय ने आगे कहा कि वे समुद्री आवाजाही के पूरे अधिकारों को बहाल करने के लिए एक राजनयिक समाधान की वकालत करेंगे.

इस बैठक में तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ईरान के बीच युद्ध के राजनयिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दे सकते हैं. फिदान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री जहाजों के सुरक्षित आवाजाही और उनकी स्वतंत्रता पर भी रोशनी डालेंगे. साथ ही सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के खिलाफ सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए तुर्की के समर्थन को दोहरा सकते हैं. बता दें कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच मक्का डिफेंस एग्रीमेंट है. मक्का एग्रीमेंट के मुताबिक एग्रीमेंट में शामिल किसी भी देश पर हुए हमले को एग्रीमेंट में शामिल सभी देशों पर हमला माना जाएगा और उस स्थिति में एग्रीमेंट में शामिल देश मदद करेंगे. यह सैन्य मदद भी होगा.

spot_img
1,716FansLike
6,134FollowersFollow
118FollowersFollow
21,300SubscribersSubscribe