Jamia Protest News: जामिया मिलिया इस्लामिया (यूनिवर्सिटी) में पिछले 20 सालों से छात्र संघ के चुनाव बंद थे. जामिया में छात्र संघ को बहाल करने और चुनाव करवाने की मांग को लेकर पिछले दो हफ्तों से कैंपस में प्रदर्शन हो रहे थे. कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे और उनके साथ सैकड़ों दीगर छात्र प्रदर्शन कर रहे थे. इस बीच जामिया एडमिनिस्ट्रेशन ने सोमवार (26 अक्टूबर) को एक ऑर्डर जारी किया है, जिसमें उन्होंने ऐलान किया है कि जामिया एडमिनिस्ट्रेशन ने छात्रों की सभी मांगों को मान ली है और छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों बाद चुनाव कराए जाएंगे. प्रदर्शनकारी छात्रों ने एडमिनिस्ट्रेशन के इस ऑर्डर को खारिज कर दिया है. इस ऑर्डर के बावजूद छात्रों ने अपना प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है.
छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल अभी भी जारी रखी है. छात्रों का कहना है कि वे अपनी भूख हड़ताल और प्रदर्शन को तब तक जारी रखेंगे, जब तक कि जामिया एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से छात्र संघ चुनाव की तारीख का ऐलान न कर दिया जाए. छात्रों का कहना है कि इस नोटिस में चुनाव प्रक्रिया के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं दी गई है और न ही प्रॉक्टर के इस्तीफे की उनकी मांग पर कोई बात कही गई है.
जामिया एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से जारी इस ऑर्डर में कहा गया है, “जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ की चुनाव, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिन बाद आयोजित किए जाएंगे.” बाता दें कि सोमवार (26 अक्टूबर) की सुबह करीब 4:30 बजे जामिया के रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शकारी छात्रों के सामने एडमिनिस्ट्रेशन का ऑर्डर पेश किया और प्रदर्शन खत्म करने की अपील की. लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों ने ऑर्डर को खारिज कर दिया.
छात्रों का कहना है कि इस ऑर्डर में छात्र संघ के संविधान को स्वीकार करने के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं बताई गई है. उनका कहना है कि उनके आंदोलन का मकसद कैंपस में लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्रों के सार्थक प्रतिनिधित्व को हासिल करना है, न कि केवल अस्पष्ट आश्वासनों को मान लेना. साथ ही उनका यह भी कहना है कि इस ऑर्डर में छात्रों की सभी मांगों को शामिल नहीं किया गया है, जैसे प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग और छात्र संघ चुनाव की तारीख का ऐलान. इसीलिए प्रदर्शन अभी भी जारी है. गौरतलब है कि जामिया मिलिया इस्लामिया में साल 2006 में छात्र संघ चुनाव पर रोक लगा दी गई. छात्र संघ चुनाव पर रोक की वजह से पिछले 20 सालों से जामिया में स्टूडेंट यूनियन नहीं है.
