Jamia Student Protest: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज़ हो गया है। चार छात्र पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्रों ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। वहीं, प्रशासन ने मांगों पर विचार करने के लिए सात सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है।
देश की चौथी सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी कही जाने वाली जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पिछले 20 साल से बंद पड़े छात्र संघ को बहाल करने और चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। चार छात्र पिछले 10 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराना ज़रूरी है, ताकि उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाया जा सके।
छात्रों की तीन प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी छात्रों ने जामिया एडमिनिस्ट्रेशन के सामने तीन मांगें रखी हैं।
पहली और सबसे ज़रूरी मांग है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट यूनियन (JMISU) को बहाल किया जाए और छात्र संघ के चुनाव कराए जाएं।
दूसरी मांग है कि जिन छात्रों को सस्पेंड किया गया है, उनका सस्पेंशन वापस लिया जाए।
तीसरी मांग है कि जामिया के प्रॉक्टर इस्तीफा दें। छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बदसलूकी की गई।
17 अक्टूबर को क्या हुआ था?
17 अक्टूबर को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को सुबह करीब 5 बजे जामिया के सिक्योरिटी गार्ड्स ने कैंपस से बाहर कर दिया। इसके साथ ही कैंपस को पूरी तरह बंद कर दिया गया और कैंपस के बाहर भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई।
इसके बाद 17 अक्टूबर की शाम को छात्र गेट नंबर 7 पर एकजुट हुए और जबरन कैंपस में दाखिल हो गए। छात्र दोबारा धरना स्थल पर पहुंचे और वहां बैठ गए। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कई छात्रों को डिटेन भी किया।
छात्र संघ क्यों चाहते हैं छात्र?
छात्रों का कहना है कि स्टूडेंट यूनियन न होने की वजह से प्रशासन उनके साथ मनमाना व्यवहार करता है। उनका आरोप है कि जामिया के गार्ड्स छात्रों के साथ बदसलूकी करते हैं और हॉस्टल में खराब खाना मिलने जैसी समस्याओं का भी उन्हें सामना करना पड़ता है।
छात्रों के मुताबिक, शिकायत करने पर उन्हें शो-कॉज नोटिस और सस्पेंशन की धमकी दी जाती है। उनका कहना है कि अपनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए उन्हें ऐसे प्रतिनिधित्व की ज़रूरत है, जो उनकी आवाज़ को मजबूती से उठा सके।
छात्रों का मानना है कि यूनिवर्सिटी में सिर्फ डिग्री हासिल करना ही ज़रूरी नहीं है। यूनिवर्सिटी एक ऐसी जगह भी है, जहां से लीडर निकलते हैं और लीडरशिप क्वालिटी विकसित होती है। यही लीडरशिप आगे चलकर देश को आगे ले जाने में भूमिका निभाती है।
इसी वजह से छात्र जामिया में स्टूडेंट यूनियन की बहाली और नियमित चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।
2006 में आखिरी बार हुए थे छात्र संघ के चुनाव
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ के चुनाव आखिरी बार साल 2006 में हुए थे। मार्च 2006 में जामिया एडमिनिस्ट्रेशन ने कैंपस में लगातार हो रही हिंसा और अशांति का हवाला देते हुए स्टूडेंट यूनियन को भंग कर दिया था। इसके बाद से यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। अब करीब 20 साल बाद छात्र एक बार फिर छात्र संघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।
AMU में छात्र संघ की बहाली के बाद तेज़ हुई मांग
हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में करीब आठ साल बाद स्टूडेंट यूनियन की बहाली के बाद जामिया में भी छात्र संघ को बहाल करने की मांग तेज़ हो गई है। प्रदर्शनकारी छात्रों का सवाल है कि जब देश की दूसरी यूनिवर्सिटीज में छात्र संघ के चुनाव हो सकते हैं, तो जामिया मिल्लिया इस्लामिया में चुनाव क्यों नहीं कराए जा सकते?
छात्रों के मुताबिक, छात्र संघ उनकी आवाज़ को प्रशासन तक पहुंचाने का एक ज़रिया है। ऐसे में सवाल यह भी है कि जामिया जैसी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की ज़रूरत कितनी अहम है और क्या इसकी बहाली से छात्रों की समस्याओं का समाधान निकल सकता है?
जामिया प्रशासन ने बनाई सात सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी
18 अक्टूबर की देर रात जामिया एडमिनिस्ट्रेशन ने एक नोटिस जारी कर सात सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी के गठन की जानकारी दी। जामिया मिल्लिया इस्लामिया की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, छात्रों की मांगों पर चर्चा करने और कैंपस में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए इस समिति का गठन किया गया है। समिति प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों पर विचार करेगी, उनसे बातचीत करेगी और उनकी मांगों की जांच करेगी। इसके साथ ही कैंपस में शांति बहाल करने के लिए ज़रूरी कदम उठाएगी।
