Bangladesh Garment Workers Protest: बांग्लादेश में कपड़ा तैयार या बनाने वाली फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. बीते रविवार (1 अक्टूबर) को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 10 लाख कपड़ा मजदूरों ने विरोध-प्रदर्शन किया और अपने मासिक तनख्वाह बढ़ाने की मांग की. मजदूरों की मुख्य मांग है कि इनकी मासिक तनख्वाह को बढ़ाकर कम से कम 30 हज़ार टका (लगभग 21 हज़ार रुपये) कर दिया जाए. पहले इन मजदूरों को 12,500 टका (लगभग 8,800 रुपये) मासिक वेतन मिलते थे. कपड़ा मजदूर अपने मासिक वेतन को बढ़ाने की मांग इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि बाज़ार में सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे उनकी मजदूरी और बजार के कीमतों में अंतर बढ़ता जा रहा है.
श्रम एवं रोज़गार मंत्री आरिफ़ुल हक़ चौधरी ने रविवार को छह सदस्यीय एक वेतन बोर्ड का गठन किया है और मजदूरों से प्रदर्शन न करने की अपील की है. हालांकि प्रदर्शनाकरियों का कथित तौर पर कहना है कि वह सिर्फ वेतन बोर्ड के गठन हो जाने से प्रदर्शन को खत्म नहीं करेंगे, बल्कि जब तक उनकी न्यूनतम वेतन की घोषणा नहीं की जाती, तब तक प्रदर्शन करेंगे.
यह प्रदर्शन बांग्लादेश के कई इंडस्ट्रियल इलाकों जैसे, सावर, अशुलिया, मीरपुर और गाज़ीपुर में रेडीमेड में हुए. इन प्रदर्शनों के चलते शुरुआत में तीस फ़ैक्ट्रियों ने अपने यहां काम बंद होने की घोषणा की. रविवार को प्रभावित फ़ैक्ट्रियों की संख्या तेजी से बढ़कर 500 हो गई. वहीं, इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुए. प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी हुईं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले दागे.
इन प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने रविवार (1 अक्टूबर) की रात सचिवालय में मंत्रियों और सलाहकारों के साथ एक बैठक की. इस बैठक में प्रशासन को यह निर्देश दिया गया कि रेडीमेड कपड़ा फैक्ट्रियों में काम को जारी रखा जाए और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और श्रम एवं रोज़गार मंत्री आरिफ़ुल हक़ चौधरी ने कहा कि बैठक में हिंसा से सख़्ती से निपटने का फ़ैसला लिया गया है.
