Police Assault Muslim Female Journalist: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का एक प्रतिनिधिमंडल पत्रकार शाहीन खान, नफीसा खान और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और दिल्ली पुलिस कर्मियों द्वारा कथित हमले को लेकर उनके साथ एकजुटता व्यक्त की. प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर और राष्ट्रीय सचिव आई. करीमुल्ला और सलमान अहमद शामिल थे.
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अन्याय व दुर्व्यवहार के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाने के लिए दोनों पत्रकारों के साहस और दृढ़ संकल्प की सराहना की. पत्रकारों ने प्रतिनिधिमंडल को विस्तार से घटना के बारे में बताया और आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने बिना किसी स्पष्ट कारण या कानूनी आधार के उन्हें परेशान किया और उनके साथ मारपीट की. उन्होंने आरोप लगाया कि जब पुलिसकर्मियों को जब उनके मुस्लिम समुदाय से होने का पता चला तो हमले की तीव्रता बढ़ गई.
प्रोफ़ेसर सलीम इंजीनियर ने धर्म के आधार पर अपराधों और भेदभावपूर्ण व्यवहार के आरोपों पर गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने खास तौर पर इस बात पर ज़ोर दिया कि FIR दर्ज कराना हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है. अगर किसी व्यक्ति की दूसरे व्यक्ति के ख़िलाफ़ कोई शिकायत है, तो दोषी कौन है और सज़ा क्या होगी यह तय करना आख़िरकार अदालतों का काम है. हालांकि, कम से कम एक FIR तो दर्ज होनी ही चाहिए ताकि मामले की जांच कानून के अनुसार की जा सके. जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने मांग की कि FIR तुरंत दर्ज की जाए, निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए.
प्रोफ़ेसर सलीम इंजीनियर ने नागरिकों के प्रति पुलिसकर्मियों के व्यवहार के बारे में उन्हें संवेदनशील बनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया और देश में व्यापक पुलिस सुधारों की मांग की. पुलिस संस्थाओं को पेशेवर तरीके, संयम और नागरिकों की गरिमा का सम्मान करते हुए काम करना चाहिए, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी के साथ पुलिस की अनुचित ज्यादती न हो. जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने शाहीन खान, नफीसा खान और उनके परिवारों को न्याय की लड़ाई में संगठन के पूरे सहयोग, समर्थन और एकजुटता का भरोसा दिलाया.

