जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (Jamia Millia Islamia) के इस्लामिक स्टडीज विभाग के प्लेसमेंट सेल द्वारा “इस्लामिक स्टडीज में विविध करियर अवसर” (Diverse Career Opportunities in Islamic Studies: A Reappraisal in the Light of Contemporary Demands) विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को बदलते समय के अनुसार नए करियर विकल्पों से परिचित कराना और उन्हें अपने भविष्य की दिशा स्पष्ट करने के लिए प्रेरित करना था.
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मोहम्मद इरशाद आलम ने रखी बात
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में हमारी सदा ट्रस्ट, सदा टाइम्स और Novagen Edge Pvt. Ltd. के संस्थापक मोहम्मद इरशाद आलम ने अपने विचार स्टूडेंट्स से साझा किए. उन्होंने कहा कि इस्लामिक स्टडीज के छात्रों के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य, सही योजना और निरंतर मेहनत आवश्यक है.

‘एकेडमिक जर्नी सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रखनी चाहिए..’
मोहम्मद इरशाद आलम ने इस बात पर जोर दिया कि स्टूडेंट्स को डिपार्टमेंट में अपनी एकेडमिक जर्नी को सिर्फ डिग्री लेने तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए. इसके बजाय, अपनी पढ़ाई के दौरान, उन्हें एक साथ सेंट्रल और स्टेट लेवल के कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी करनी चाहिए. साथ ही खुद को अलग- अलग एकेडमिक और प्रोफेशनल स्किल्स से तैयार करना चाहिए ताकि वे काबिल, जिम्मेदार और प्रोडक्टिव नागरिक बन सकें, और समाज में पॉजिटिव और असरदार तरीके से योगदान दे सकें.

उन्होंने आगे कहा कि ईमान, सच्चाई, मेहनत और सही योजना ये चार बुनियादी स्तंभ हैं, जो इंसान को इस दुनिया में सफलता और आखिरत में कामयाबी दिला सकते हैं.
इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष ने क्या कहा?
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष और मानविकी एवं भाषा संकाय के डीन, प्रोफेसर इक्तेदार मोहम्मद खान ने अपने संबोधन में कहा कि छात्रों को अपने शैक्षणिक जीवन में सवाल पूछने, शोध करने और आलोचनात्मक सोच विकसित करने की आदत डालनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पहली नजर में इस्लामिक स्टडीज़ के फील्ड में करियर की संभावनाएं सीमित लग सकती हैं, लेकिन असलियत यह है कि यह फील्ड बहुत सारे और अलग-अलग मौके देता है, जरूरत है इन रास्तों की सही पहचान और असरदार गाइडेंस की.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस्लामिक स्टडीज के स्टूडेंट के एक हाथ में धर्म का इतिहास और दूसरे हाथ में आज की एकेडमिक डिग्री होनी चाहिए. सिर्फ यही कॉम्बिनेशन उन्हें धार्मिक और दुनियावी दोनों क्षेत्रों में सफलता पाने में मदद कर सकता है.

