Homeधर्मMadhya Pradesh: 'Bhojshala परिसर में पढ़वाई गई डमी नमाज..' स्थानीय मुस्लिमों के...

Madhya Pradesh: ‘Bhojshala परिसर में पढ़वाई गई डमी नमाज..’ स्थानीय मुस्लिमों के आरोप से विवाद, जानें पूरा मामला

धार के गुलमोहर कॉलोनी के स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि स्थानीय मुसलमानों को परिसर से दूर रखकर 'डमी नमाज' यानी कि नकली नमाज पढ़वाई गई.

Bhojshala Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद परिसर (Bhojshala-Kamal Maula complex) में शुक्रवार, 23 जनवरी के दिन हिंदू और मुस्लिम समुदायों को अलग- अलग समय में प्रार्थना करने का निर्देश दिया था. कोर्ट के निर्देश के बाद मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन ने बताया कि भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद परिसर में बसंत पंचती की पूजा और नमाज दोनों संपन्न हुई. हालांकि इसी बीच स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि वहां नकली नमाज अदा करवाई गई. इस आरोप के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है.

धार के गुलमोहर कॉलोनी के स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि स्थानीय मुसलमानों को परिसर से दूर रखकर ‘डमी नमाज’ यानी कि नकली नमाज पढ़वाई गई.

स्थानीय मुसलमानों ने आगे कहा कि गुरुवार रात अधिकारियों ने उन्हें पुलिस सुरक्षा में लेकर कहा था कि शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच ASI संरक्षित परिसर में नमाज पढ़ने दी जाएगी.

स्थानीय मुस्लिमों का गंभीर आरोप

उन्होंने कहा कि हमें निगरानी में रखा गया, लेकिन जब नमाज का समय खत्म होने वाला था, तो हमें घर लौटने को कह दिया गया. अब प्रशासन कह रहा है कि अंदर नमाज हुई, लेकिन वो हम लोग नहीं थे.

गुलमोहर कॉलोनी के निवासियों का आरोप है कि उन्हें कमाल मौला मस्जिद के पास करीब 16 घंटे तक रोके रखा गया और परिसर के अंदर जाने नहीं दिया गया. उनका कहना है कि मस्जिद के पीछे के हिस्से में कुछ लोगों को नमाज पढ़ते हुए दिखाने वाला एक वीडियो बनाया गया, ताकि कोर्ट के आदेश का पालन दिखाया जा सके.

उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमने प्रशासन की हर बात मानी, उनका साथ दिया, लेकिन प्रशासन ने उनके साथ धोखा किया है.

प्रशासन ने क्या कहा?

हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय ने सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी को जारी आदेश के अनुसार परिसर के अंदर शांतिपूर्वक नमाज अदा की. प्रशासन के मुताबिक, कोर्ट के आदेश में हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति दी गई थी, जबकि मुसलमानों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच एक तय और अलग जगह पर नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश था?

बता दें कि इस वसंत पंचमी, शुक्रवार के दिन पड़ा था. इसे देखते हुए गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों को शुक्रवार को अपनी- अपनी प्रार्थना (पूजा और नमाज) करने की इजाजत दी थी. साथ ही, सख्त नियम लागू करने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शुक्रवार की नमाज मस्जिद के अंदर एक तय जगह पर दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच होगी, और नमाज के तुरंत बाद लोग वहां से चले जाएंगे. वहीं दूसरी ओर सरस्वती पूजा के इंतज़ाम अलग से किए जाएंगे, ताकि कोई टकराव या भीड़ से जुड़ी कोई दिक्कत न हो.

spot_img
1,716FansLike
6,134FollowersFollow
118FollowersFollow
20,100SubscribersSubscribe