मध्य प्रदेश: खरगोन में कर्फ्यू जारी, अब भी दहशत में लोग, मुस्लिम परिवार के पलायन की खबरें

खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में राम नवमी के दिन भड़की हिंसा के बाद लगाया गया कर्फ्यू गुरुवार यानी आज पांचवें दिन भी जारी है. वहीं, खबर है कि आज से कर्फ्यू में कुछ ढील दी जायेगी. इसमें महिलाओं को दो घंटे की छूट मिल सकती है. कर्फ्यू के दौरान सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएं चालू हैं. पुलिस और प्रशासन ने लोगों से घरों में रहने की अपील की है. वहीं लोग दहशत में हैं और प्रशासन लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिला रहा है. इसके साथ ही कई इलाकों से मुस्लिम परिवार के पलायन की खबर भी सामने आ रही हैं.

खरगोन में राम नवमी के दिन निकल रहे जुलूस में डीजे बजाए जाने को लेकर हुए विवाद के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी और जमकर पत्थरबाजी हुई. हिंसा को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. कई घरों और दुकानों में भी आग लगा दी गई. हालात बिगड़े तो कर्फ्यू लगा दिया गया.

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, अब तक लगभग 100 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. वहीं, इस साम्प्रदायिक हिंसा के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहरा कर उनकी संपत्ति को जमींदोज किया जा रहा है. बुलडोज़र से मुसलमानों के घरों और दुकानों को तोड़ा जा रहा है. सुरक्षा के मद्देनजर चार भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी, 15 डीएसपी सहित आर ए एफ की कंपनी और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है.

मुसलमानों के घरों और दुकानों को बुलडोज़र से तोड़ा गया. फोटो : ट्विटर

हिंसा के बाद लगाया गया कर्फ्यू बुधवार को चौथे दिन भी जारी रहा. कई क्षेत्रों के लोग अब भी दहशत में हैं और वे अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कई परिवार और लोग अपना घर मकान छोड़कर पलायन करने की तैयारी में हैं और वहां यह लिखा नजर आ रहा है कि यह मकान बिकाऊ है. इस मामले में जब जिलाधिकारी अनुग्रह पी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है, पलायन की बात पूरी तरह अफवाह है. पलायन की जो बात आ रही है उसकी पुष्टि के लिए वे स्वयं कुछ इलाकों में पहुंची तो लोगों ने कहा कि आखिर वे अपना घर छोड़कर क्यों जाएंगे?

यह मकान बिकाऊ है: कई परिवार पलायन करने पर मजबूर. फोटो : ईटीवी भारत

दारुल कजा और दारुल इफ्ता ने पुलिस महानिदेशक को एक ज्ञापन भेजकर कहा है, ‘पुलिस और दंगाइयों द्वारा मुस्लिम समाज को निशाना बनाकर उनके घरों, मकान, दुकान को तोड़ा और जलाया गया है. वहीं, बेकसूर लोगों को जेल में ठूंसा गया. प्रशासन द्वारा बिना जांच मुस्लिम समाज के कई और दुकानें तोड़ी गईं, जिस पर 100 परिवारों को खरगोन से पलायन करना पड़ा है. यह मुस्लिम समाज के खिलाफ जुल्म है और कानून का खुला उल्लंघन.’

बता दें कि अभी तक इस हिंसा की जांच भी नहीं हुई है कि हिंसा अचानक किसने और क्यों, किस तरफ से शुरू की. क्या जुलूस को मुस्लिम इलाके से ले जाने की अनुमति दी गई थी. लेकिन उससे पहले खरगोन की मुस्लिम बस्तियों में बुलडोजर भेज कर मकानों को तोड़ कर गिरा दिया गया है और सरकार मुसलमानों को ही ज़िम्मेदार मान रही है.

(इनपुट ईटीवी भारत/आईएएनएस)

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