Homeविदेशफ्रांस के बाद माल्टा ने फिलिस्तीन को मान्यता देने का किया ऐलान.....

फ्रांस के बाद माल्टा ने फिलिस्तीन को मान्यता देने का किया ऐलान.. ब्रिटेन ने भी इजराइल को दी चेतावनी, जानें क्या कहा?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने घोषणा की कि ब्रिटेन सितंबर में फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देगा. यदि इजराइल गाजा में युद्ध विराम के लिए सहमत न हो और स्थायी शांति की दिशा में ठोस कदम न उठाए.

Malta announced recognition of Palestine: माल्टा के प्रधानमंत्री रॉबर्ट अबेला (Robert Abela) ने मंगलवार, 29 जुलाई की शाम को कहा कि माल्टा सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की घोषणा करेगा. माल्टा ने फ्रांस (France) और ब्रिटेन (Britain) की घोषणा के बाद यह घोषणा की.

रॉबर्ट अबेला ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि हमारा रुख मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति के प्रयासों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

रॉबर्ट अबेला ने क्या कहा?

माल्टा के प्रधानमंत्री रॉबर्ट अबेला ने आगे कहा कि माल्टा सरकार पर फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के लिए अपने ही देश से दबाव बढ़ रहा था. जुलाई के मध्य में दक्षिणपंथी विपक्ष ने भी तत्काल मान्यता की मांग की थी.

बता दें कि भूमध्यसागरीय यूरोपीय संघ के इस द्वीप का फिलिस्तीनी मुद्दों के समर्थन का इतिहास रहा है और उसने द्वि-राष्ट्र समाधान के प्रयासों का समर्थन किया है. अबेला ने पहली बार मई में फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की योजना की घोषणा की थी और कहा था कि इस पर जून में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में चर्चा होगी, लेकिन बाद में सम्मेलन स्थगित कर दिया गया था.

ब्रिटेन भी फिलिस्तीन को मान्यता देगा

बता दें कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर (Keir Starmer) ने भी माल्टा के घोषणा करने से पहले मंगलवार को घोषणा की कि ब्रिटेन सितंबर में फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देगा. यदि इजराइल गाजा में युद्ध विराम के लिए सहमत न हो और स्थायी शांति की दिशा में ठोस कदम न उठाए.

कीर स्टार्मर ने कहा कि यदि इजराइल कुछ शर्तों को पूरा करने में विफल रहता है, तो ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन करेगा.

ब्रिटेन ने ये शर्तें रखी?

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, इन शर्तों में गाजा में चल रहे सैन्य अभियानों को समाप्त करना, पश्चिमी तट पर कब्जे की योजनाओं को रोकना और दो-राष्ट्र समाधान के लिए ठोस कदम उठाना होना शामिल है.

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