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18 साल बाद बेकसूर साबित हुए SIMI से संबंध के आरोप में 8 मुस्लिम युवक, नागपुर कोर्ट ने किया बरी

नागपुर की अदालत ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ न तो किसी मीटिंग में शामिल होने, न कोई संवाद, न प्रचार और न ही आर्थिक मदद देने का कोई सबूत है.

Nagpur News: नागपुर की एक अदालत ने लगभग 18 सालों बाद UAPA के आरोप में जेल में आठ मुस्लिम युवकों को सभी आरोपों से बरी कर दिया. इन पर प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) की मीटिंग करने और पर्चे बांटने का आरोप लगाया गया था.

नागपुर की अदालत ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ न तो किसी मीटिंग में शामिल होने, न कोई संवाद, न प्रचार और न ही आर्थिक मदद देने का कोई सबूत है.

UAPA के तहत जेल में बंद थे

इन सभी बेकसूर लोगों के खिलाफ साल 2006 में केस दर्ज हुआ तब उनकी उम्र करीब 30 साल थी. उनके खिलाफ आतंकवाद से जुड़ा कानून – गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) भी लगाया गया था. इनमें से ज्यादातर लोग नागपुर के रहने वाले हैं. अब 13 अगस्त 2025 को नागपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया.

कोर्ट ने और क्या कहा?

न्यायिक मजिस्ट्रेट ए. के. बांकर ने इस केस के फैसले के दौरान कहा कि आरोपियों के खिलाफ किसी मीटिंग में शामिल होने, संपर्क करने, प्रचार करने या आर्थिक या किसी और तरह की मदद करने का कोई सबूत नहीं है. केवल किसी संगठन से जुड़े दस्तावेज या साहित्य रखने मात्र से, जब तक उसमें सक्रिय इरादा या भागीदारी का सबूत न हो, उसे कानून के तहत अपराध नहीं माना जा सकता.

पुलिस ने क्या दावा किया था?

बता दें कि पुलिस ने दावा किया था कि उन्हें इन लोगों के SIMI से जुड़े होने के बारे में गोपनीय जानकारी मिली थी.
हालांकि, मुकदमे के दौरान पुलिस यह साबित करने के लिए कोई रिकॉर्ड नहीं ला सकी कि गोपनीय जानकारी प्राप्त हुई थी और आगे की जांच के लिए दर्ज की गई थी.

पुलिस ने यह भी दावा किया था कि आरोपियों के घर से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी, लेकिन कोर्ट में इसकी कोई पक्की पुष्टि नहीं हो सकी.

पुलिसकर्मियों के अलावा जिन स्वतंत्र गवाहों को पुलिस ने यह कहकर पेश किया था कि वे आरोपियों की गतिविधियों के बारे में जानते हैं, उन्होंने भी अदालत में पुलिस के दावों का समर्थन नहीं किया.

इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था

केस के आरोपी शकील वारसी, शाकिर अहमद नासिर अहमद, मोहम्मद रेहान अतुल्लाखान, जियाउर रहमान महबूब खान, वकार बैग यूसुफ बैग, इम्तियाज अहमद निसार अहमद, मोहम्मद अबरार आरिफ मोहम्मद काशिम और शेख अहमद शेख को UAPA की धारा 10 और 13 के आरोपों से बरी कर दिया गया है.

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