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भारत में मुसलमानों और ईसाइयों को निशाना बनाकर 2025 में 1300 से ज्यादा हेट स्पीच दिए गए- रिपोर्ट

इंडिया हेट लैब (IHL) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 21 राज्यों, एक केंद्र शासित प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अल्पसंख्यकों, मुसलमानों और ईसाइयों को निशाना बनाते हुए 1,318 नफरती भाषण दर्ज किए गए.

Hate Speech Against Muslims: सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट (CSOH) के एक प्रोजेक्ट इंडिया हेट लैब (IHL) ने भारत में अल्पसंख्यकों, जिसमें खासतौर पर मुसलमानों और ईसाइयों को टारगेट करने वाली हेट स्पीच घटनाओं की सालाना रिपोर्ट जारी की है. इंडिया हेट लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में मुसलमानों और ईसाइयों को निशाना बनाकर 1,318 नफरती भाषण दिए गए.

मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ  हर दिन औसतन चार नफरती भाषण

इंडिया हेट लैब (IHL) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 21 राज्यों, एक केंद्र शासित प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अल्पसंख्यकों, मुसलमानों और ईसाइयों को निशाना बनाते हुए 1,318 नफरती भाषण दर्ज किए गए. आंकड़ों के मुताबिक, हर दिन औसतन चार नफरती भाषण की घटनाएं सामने आई.

साल 2025 में नफरती भाषणों की संख्या 2024 की तुलना में 13 प्रतिशत और 2023 की तुलना में 97 प्रतिशत बढ़ी है. साल 2023 में ऐसी 668 घटनाएं दर्ज की गई थीं.

क्या कहती है रिपोर्ट?

बता दें कि 1,289 यानी कि 98 प्रतिशत भाषण मुसलमानों को निशाना बनाकर दिए गए. इनमें 1,156 मामलों में सीधे तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाया गया, जबकि 133 मामलों में ईसाइयों के साथसाथ मुसलमानों को भी शामिल किया गया. यह संख्या 2024 में दर्ज 1,147 मामलों की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत ज्यादा है.

वहीं ईसाइयों को निशाना बनाकर 162 घृणास्पद भाषण दिए गए, जो कुल घटनाओं का 12 प्रतिशत हैं. इनमें 29 मामलों में सीधे तौर पर ईसाइयों को निशाना बनाया गया, जबकि 133 मामलों में मुसलमानों के साथ ईसाइयों के खिलाफ नफरती भाषण दिए गए. यह संख्या 2024 में दर्ज 115 ईसाई विरोधी घृणास्पद भाषणों की तुलना में लगभग 41 प्रतिशत ज्यादा है.

बता दें कि 1164 यानी कि 88 प्रतिशत नफरती भाषण उन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में दिए गए, जहां बीजेपी की सरकार या फिर बीजेपी के साथ गठबंधन की सरकार है.

सबसे ज्यादा घृणास्पद भाषण इन राज्यों में

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 266, महाराष्ट्र में 193, मध्य प्रदेश में 172, उत्तराखंड में 155 और दिल्ली में 76 नफरती भाषण की घटनाएं दर्ज की गईं.

वहीं विपक्षी शासित सात राज्यों में 154 घृणास्पद भाषण की घटनाएं दर्ज की गईं. इन राज्यों में 2024 में दिए गए नफरती भाषणों के मुकाबले 34 प्रतिशत की कमी आई है. 2024 में इन राज्यों में 234 घटनाएं सामने आई थीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल महीने में सबसे अधिक नफरती भाषण दर्ज किए गए. ये घटनाएं राम नवमी की शोभायात्राओं और पहलगाम आतंकी हमले के बाद आयोजित रैलियों के दौरान दर्ज की गई.

इन साजिशों के तहत दिए गए घृणास्पद भाषण

कुल 656, लगभग 50 प्रतिशत घृणास्पद भाषणों में तथाकथित लव जिहाद, लैंड जिहाद, जनसंख्या जिहाद, थूक जिहाद, शिक्षा जिहाद, नशा जिहाद, और वोट जिहादका जिक्र किया गया. यह पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है.

308 भाषणों में सीधे तौर पर हिंसा का आह्वान किया गया, जबकि 136 भाषणों में सीधे हथियार उठाने की अपील की गई. वहीं 120 घृणास्पद भाषणों में स्पष्ट रूप से अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुसलमानों का सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार करने का आह्वान किया गया. ये 2024 की तुलना में 8 प्रतिशत ज्यादा था.

बता दें कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में 289 घृणास्पद भाषण दी गई. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद है, जिससे 138 घटनाएं जुड़ी थीं.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने सबसे ज्यादा नफरती भाषण दिए

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2025 में सबसे ज्यादा 71 घृणास्पद भाषण दिए. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के प्रमुख प्रवीन तोगड़िया ने 46 और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने नफरती 35 भाषण दिए.

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