सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात पुलिस द्वारा 17 वर्षीय नाबालिग मुस्लिम लड़के आर्यन मखियाला को पुलिस हिरासत में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है. पीड़ित लड़के की बहन ने ये याचिका दायर की है.
याचिका पर क्या मांग की गई?
पीड़ित नाबालिग लड़के की बहन द्वारा दायर यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने पेश की गई. याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में घटना की जांच के लिए गुजरात कैडर के पुलिस अधिकारियों को छोड़कर एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की गई है. साथ ही वैकल्पिक रूप से, इसमें कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की गई है.
साथ ही याचिकाकर्ता ने हिरासत में यातना और यौन हिंसा की जांच के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS), यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है.
क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला गुजरात के बोटाड जिले का है. यहां के रहने वाले नाबालिग मुस्लिम लड़के आर्यन मखियाला को पुलिस ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया. इसके बाद थाने में नाबालिग लड़के को लगातार नौ दिनों तक कथित रूप से बेरहमी से पीटा.
परिवार ने आरोप लगाया है कि नाबालिग लड़के को शारीरिक एवं सेक्सुअली रूप से शोषण किया गया है. उसके गुप्तांगों में डंडे डाले गए थे. पुलिस के बर्बर तरीके से किए शोषण से नाबालिग लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया है और अभी अस्पताल में भर्ती है.
कांग्रेस विधायक ने कार्रवाई की मांग की
इस घटना पर कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि मैं गुजरात सरकार, डीजीपी, गृह सचिव और गृह मंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग करता हूं. इस अमानवीय घटना में शामिल पुलिस कांस्टेबल से लेकर SP तक सभी के खिलाफ हिरासत में यातना (custodial torture) का मामला दर्ज किया जाना चाहिए.

