दिल्ली में साजिश के तहत करवाए गए थे दंगे: डॉ. जफरुल इस्लाम खान

दिल्ली हिंसा के दो साल पूरे होने पर लगातार दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में प्रेस कांफ्रेंस की जा रही हैं और इस बात को उठाया जा रहा है कि दो साल बाद भी बहुत से लोगों को अभी तक इंसाफ नहीं मिला है. कोर्ट, पुलिस और मीडिया पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं कि इन्होंने ईमानदारी से अपना काम नहीं किया. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गयी थी जिसमें ज़्यादातर मुस्लमान ही थे और अब भी लगभग 1500 लोग ऐसे हैं जो जेलों में बंद हैं जिनकी सुनवाई तक नहीं हो रही है और इंसाफ के मुन्तज़िर हैं.

इस प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान (Zafarul Islam Khan) ने मीडिया से बात करते हुए दिल्ली दंगे के बारे में कहा कि एक धारा बनी हुई है कि किस को बचाना है और किस को जेल में डालना है. ये एक साज़िश थी, बहार से लोग लाये गए और सब ने देखा ये एक हक़ीक़त है. बेक़सूर लोगों को आरोपी बना कर जेल में डाल दिया गया है. ऐसे लोग डेढ़ हज़ार के करीब हैं जिनके बारे में बात नहीं हो रही है, ऐसे लोगों के बारे में भी बात होनी चाहिए. इनको भी सपोर्ट मिलनी चाहिए ताकि इनको भी जल्द से जल्द इंसाफ मिल सके.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस पहले दिन से ही गलत रास्ते पर थी. उस वक़्त भी जब दंगा हो रहा था लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जो लोगों को बचाये भी, लेकिन कुछ थे जो दंगे में शामिल थे.

उन्होंने कहा कि पुलिस के तीन रोल थे. कुछ लोग जो खड़े हो कर सिर्फ देखते रहे और कुछ लोगों ने मदद भी की लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जो दंगाईयों के साथ खड़े हुए.

उन्होंने कहा कि एक न्यायिक जांच होनी चाहिए जिसमें हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज होते हैं. उनके पास ताक़त भी होती है और इनके अधीन जांच होनी चाहिए, ये जब तक नहीं होंगे सच सामने नहीं आएंगे.

उन्होंने दिल्ली सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एक आदमी की मौत हो जाती है तो उसको दस लाख दिए जाते हैं और दूसरे को एक करोड़ रुपया मुआवजा दिया जाता है तो यह बहुत अंतर है और इस तरह से नहीं होना चाहिए. ये दंगा सरकार की नाकामी की वजह से हुए हैं. इस इस तरह की नाकामी नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि कोई कहीं गिर जाये तो उसमें सरकार की कोई गलती नहीं होती है लेकिन ये जो दंगा हुआ है इसमें सरकार की कानून एवं व्यवस्था ज़िम्मेदार है. सरकार बनती ही इसलिए है ताकि नागरिकों को सुरक्षा दे सके, उनकी हिफाज़त कर सके लेकिन अगर सुरक्षा नहीं दे पाती है तो इसका मतलब है कि सरकार नाकाम हुई और इसीलिए लोगों को मुआवजा मिलता है.

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफरुल इस्लाम ने कहा कि दिल्ली हिंसा की जांच होनी चाहिए. कपिल मिश्रा, रागिनी तिवारी और हिंसा भड़काने वाले अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए. ऐसे मामलों पर बोलने से न चूंकें, नहीं तो अन्याय होता रहेगा.

उन्होंने कहा, ‘इस सरकार की मंशा ठीक नहीं है. लोगों को सच बोलने की जरूरत है.’

बता दें कि 23 फरवरी से 26 फरवरी, 2020 के दौरान सीएए आंदोलन के बीच में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़के थे, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 580 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

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