Sambhal News: संभल शाही जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी के सदर और एडवोकेट जफर अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी. जफर अली को पिछले साल नंवबर में संभल शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुए हिंसा भड़काने के आरोप में 23 मार्च को गिरफ्तार किया था.
जफर अली की जमानत याचिका मंजूर
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन की सिंगल बेंच ने जफर अली की जमानत याचिका मंजूर कर ली. कोर्ट के इस फैसले के बाद उनका जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया. जफर अली को SIT ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद से वह पिछले चार महीनों से मुरादाबाद जेल में बंद थे.
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जफर अली की ओर से यह दलील दी गई कि घटना के वक्त उनकी मौजूदगी का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. कोर्ट ने दलील सुनने के बाद जफर अली की जमानत याचिका मंजूर कर ली.
जफर अली पर इन धाराओं में केस दर्ज
जफर अली पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई धाराओं 191(2), 191(3), 190, 221, 132, 125, 324(5), 196, 223(b), और 326(F) के तहत आरोप लगाए गए हैं. साथ ही उन पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 3 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 5 के तहत भी आरोप हैं.
क्या था पूरा मामला?
बता दें कि 24 नवंबर, 2024 को एएसआई की एक टीम शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने पहुंची थी. जहां हिंदूवादी संगठनों की भीड़ “जय श्री राम” सहित कई अन्य नारे लगा रही थी. इस दौरान मस्जिद के बाहर मुसलमान भी जमा थे. जहां पुलिस ने मुसलमानों को हटाने बल का इस्तेमाल किया फिर प्रदर्शन कर रहे मुस्लिमों पर गोलियां भी चलाई. पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई में पांच मुसलमानों की मौत हो गई. पुलिस ने मुस्लिम प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” करार दिया और घटना के संबंध में कई मामले दर्ज किए.

