मुसलमानों के साथ सेक्यूलर पार्टियों ने नाइंसाफ़ी की है: असदुद्दीन ओवैसी

उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की तरक्की, सुरक्षा और समावेश के विषय पर मजलिस की तरफ से कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया और सरकारी आंकड़ों पर आधारित मुसलमानों की दुर्दशा पर रिपोर्ट का विमोचन भी हुआ.

उत्तर प्रदेश के मुसलमानों का शोषण तमाम सेक्यूलर पार्टियों ने किया है। डरा कर, बहला कर और लालच देकर उनसे वोट हासिल किया गया है, आज़ादी के बाद से उनके साथ हर सरकार ने नाइंसाफी की है। ये रिपोर्ट सरकार और विपक्षी दलों के लिए आईना है जिसमें वह अपना चेहरा देख सकते हैं. इन विचारों को ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने व्यक्त किया।

वह आज होटल फेयरफील्ड गोमती नगर लखनऊ में एक कॉन्फ्रेंस से संबोधन कर रहे थे. कॉन्फ्रेंस का आयोजन मजलिस की तरफ से किया गया था.

कांफ्रेंस के समापन पर पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए मजलिस राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अब तक पूरे देश के मुसलमानों पर सरकारी कमिशनों की रिपोर्टें आती रही हैं लेकिन यह रिपोर्ट खास उत्तर प्रदेश से संबंधित है. हमने यह रिपोर्ट इसलिए छापी है ताकि सेक्यूलर पार्टियां और जनता मुसलमानों के साथ की गई नाइंसाफी को जान सकें और उनके साथ कितना ज़्यदा जुल्म हुआ है यह भी जान लें. उनकी आबादियों में ना स्कूल है, ना अस्पताल और ना बैंक की सुविधाएं हैं, उनका ड्रॉपआउट रेट सबसे ज्यादा है, उनके लिए अलग से बजट भी नहीं दिया जाता है। बंगाल जैसे राज्य ने 2021 में मुसलमानों के लिए 300 करोड रुपए खर्च किए हैं और उत्तर प्रदेश में सिर्फ ₹210 करोड़ खर्च किए गए हैं. मदरसों के शिक्षकों को 2 साल से ज्यादा समय से तनख्वाह नहीं मिली है.

हम तमाम सेक्यूलर पार्टियों और राज्य सरकारों से मांग करते हैं कि वह इस रिपोर्ट का अध्ययन करें, अपना जायजा लें और अपने मेनिफेस्टो (घोषणापत्र) में इसके मुताबिक मुसलमानों की तरक्की के लिए रोड मेप बनाएं, नाइंसाफी का खात्मा करें. सरकार को चाहिए कि वह मुस्लिम इलाकों में ज्यादा से ज्यादा स्कूल खोलें। बैंक स्थापित करें, पलायन करने वाले मुसलमानों के लिए स्कीम लाएं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश देश का बड़ा राज्य है जहां देश की आबादी का 16% हिस्सा रहता है, उसमें मुसलमानों की आबादी 19.25% है जबकि देश में मुसलमानों का अनुपात 14.5 प्रतिशत है. यहां राजकीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के अलावा 44 सेंट्रल विश्वविद्यालय हैं. यहां बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और दारुल उलूम देवबंद जैसे प्रसिद्ध संस्थाएं मौजूद हैं, फिर भी 41% मुसलमान अनपढ़ है. राष्ट्रीय स्तर पर यह अनुपात 34% है, 28.49 प्रतिशत मुसलमान प्राइमरी तक और 16% मुसलमान मिडिल तक शिक्षा हासिल करते हैं. सिर्फ 4% मुसलमान विश्वविद्यालय तक जाते हैं. रोजगार के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर 31% के मुकाबले में उत्तर प्रदेश का अनुपात 25% है और मुसलमानों की ज्याद तर आबादी मामूली काम करके गुजारा करती है. दौलत और सम्पति के मामले में 2014-15 की स्टडी के अनुसार, 58% मुसलमानों के पास जमीन नहीं है. गरीबी के मामले में 2009-10 का नेशनल सैंपल सर्वे बताता है कि राज्य में मुसलमानों की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ ₹752 है, हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर ₹988 है.

कॉन्फ्रेंस में डॉक्टर वेंकट नारायण मोटकोरी अंजना दवा दिवाकर, डॉक्टर अमीरउल्लाह खान रिपोर्ट की रोशनी में अपने विचारों को व्यक्त किया. इस मौके पर उत्तर प्रदेश मजलिस के अध्यक्ष शौकत अली, दिल्ली मजलिस अध्यक्ष कलीमुल हफ़ीज़, राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान और आसिम वक़ार भी शरीक थे.

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